आगरा. मथुरा (Mathura) की एक अदालत ने उत्तर प्रदेश में राजधानी लखनऊ (Lucknow) एवं अन्य शहरों में बम धमाकों की कथित रूप से साजिश रचने को लेकर पिछले महीने गिरफ्तार किये गये पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के दो कार्यकर्ताओं के मामले की सुनवाई सोमवार को स्थगित कर दी. सरकारी वकील शिव राम सिंह ने कहा , ‘‘ प्रथम अतिरिक्त जिला न्यायाधीश अनिल कुमार पांडे द्वारा जारी पेशी वारंट के आधार पर आरोपियों को एसटीएफ (विशेष कार्यबल) द्वारा चार मार्च को लखनऊ जेल से लाया गया था.’’

अंशाद बदरूद्दीन और फिरोज खान को उत्तर प्रदेश आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) ने मध्य फरवरी में लखनऊ से गिरफ्तार किया था और उनके पास से 16 विस्फोटक उपकरण, बैटरियां, डेटोनेटर, पिस्तौल , कारतूस समेत अन्य हथियार एवं गोलाबारूद बरामद किये थे। दोनों ही केरल के रहने वाले हैं. न्यायाधीश ने रिमांड के अनुरोध पर सुनवाई की अगली तारीख नौ मार्च तय की है.

जीप में न बैठने की जिद पर अड़ गया

बता दें कि बीते दिनों खबर सामनेआई थी कि यूपी पुलिस के एनकाउंटर का खौफ इस कदर है कि हाथरस कांड के बहाने उत्तर प्रदेश में हिंसा फ़ैलाने की साजिश रचने के आरोप में गिरफतार पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया की स्टूडेंट विंग कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय महासचिव रऊफ शरीफ ने पुलिस की जीप में बैठने से इनकार कर दिया. दरअसल, पांच दिन की पुलिस रिमांड खत्म होने के बाद एसटीएफ रऊफ को मेडिकल करवाने के लिए ले जा रही थी, लेकिन वह पुलिस जीप में न बैठने की जिद पर अड़ गया.


आरोपित को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था

पुलिस कस्टडी खत्म होने के बाद बीते महीने मंगलवार को रऊफ को कोर्ट में पेश कर जेल भेजना था. इससे पहले एसटीएफ को कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया के राष्‍ट्रीय महासचिव का मेडिकल करवाना था. एसटीएफ के सूत्रों के मुताबिक जब सोमवार देर रात मेडिकल कराने के लिए रऊफ को सरकारी अस्पताल ले जाने के लिए सरकारी जीप में बिठाया जा रहा था तो रऊफ शरीफ अड़ गया कि वह यूपी पुलिस की जीप में नहीं बैठेंगे. काफी देर तक समझाने बुझाने के बाद शरीफ यूपी पुलिस की जीप में बैठा. उसके बाद मंगलवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय प्रथम अनिल कुमार पांडेय की अदालत पेश किया गया. यहां से अदालत ने आरोपित को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था.