आदि शक्ति स्वरूपा की आराधना का शारदीय नवरात्र का हुआ आरंभ। नवरात्र के पहले दिन सर्वार्थ सिद्धि योग में मां भगवती का आगमन होगा। अभिजीत मुहूर्त और सूर्य के तुला राशि में प्रवेश के साथ ही गुरु के धनु लग्न में होने से कलश स्थापना का इस बार महायोग बन रहा है। ऐसे में मां की आराधना से लोगों का हर तरह से कल्याण होगा।

अश्विन मास में 19 साल पर पुरुषोत्तम मास के तुरंत बाद नवरात्र का दुर्लभ संयोग आया है। ऐसे में अपनी सामर्थ्य के अनुसार भक्त मां की आराधना कर वर्ष भर के लिए सुख, शांति और सौभाग्य की आंतरिक ऊर्जा का संचय व संचार कर सकेंगे। अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 11:52 बजे के बाद कलश स्थापना आरंभ होगी।
अनुष्ठान करने वाले व्रती सबसे पहले घरों में चौकी पर नया वस्त्र बिछाकर स्वास्तिक बनाकर मां का आह्वान करें। इसके बाद मिट्टी से बनी वेदी पर जौ बोएं। नौ दिन में जौ की वृद्धि सुख-समृद्धि का प्रतीक बनेगी। पूजा में पंच पल्लव गूलर, पाकड़, आम, अशोक, शमी की पत्तियों का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके बाद वेदी पर कलश में गंगा जल और सर्व औषधियां अवश्य डालें। फिर, कलश पर चावल से भरे पूर्णपात्र पर मां के प्रतीक के रूप में नारियल सजाएं। इसके बाद अखंड दीप जलाकर मां का आह्वान करें।

ज्योतिषाचार्य पं ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार शनिवार की सुबह 7:06 बजे सूर्य तुला राशि में प्रवेश करेंगे। तुला संक्रांति नवरात्रि के आरंभ के लिए अति शुभ है। संक्रांति का पुण्यकाल दिन भर रहेगा। पुरुषोत्तम मास के तुरंत बाद पड़ने वाले नवरात्रि से परिवार, समाज और राष्ट्र में खुशहाली का योग बनेगा। इस दौरान मां की आराधना से हर तरह के रोग दूर होंगे।

प्रयागराज। शारदीय नवरात्रि के स्वाति नक्षत्र के साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। यह योग पूरे दिन रहने से किसी भी तरह की खरीद-बिक्री के लिए शुभ होगा। इस बार नवरात्र में चार सर्वार्थसिद्धि योग, एक त्रिपुष्कर और चार रवि योग बनेंगे। इन शुभ संयोगों के अलावा आनंद, सौभाग्य और धृति योग भी बन रहा है। ये शुभ संयोग जमीन में निवेश, खरीद और ब्रिकी के लिए शुभ होंगे।

नवरात्र केप्रथम दिन सर्वार्थसिद्धि योग है। इसी तरह द्वितीया को त्रिपुष्कर और सर्वार्थसिद्धि योग, तृतीया को सर्वार्थसिद्धि योग और रवि योग, चतुर्थी को सौभाग्य और शोभन योग, पंचमी को रवियोग, षष्ठी को सुकर्मा और प्रजापति योग,सप्तमी को धृति और आनंद योग, अष्टमी को शनिवार सर्वार्थसिद्धि योग और नवमी को रवियोग रहेगा। मुहूर्त - 11:52 से 12 :26 तक करें कलश स्थापना।

प्रयागराज। महीने भर भगवान विष्णु की आराधना के पुरुषोत्तम मास की शुक्रवार को अमावस्या तिथि में पूर्णाहुति हो गई। इस दौरान संगम समेत गंगा, यमुना के तटों पर दिन भर भगवान विष्णु और शिव की आराधना की गई। अरैल स्थित सोमेश्वर महादेव के अलावा मनकामेश्वर महादेव, पंडिला महादेव मंदिरों में अभिषेक और पूजन किया गया।