हाथरस । शहर के गेस्ट हाउस ओर रेस्टोरेन्ट जिस्मफरोशी के अडडे बनते जा रहे है। इस घिनोने काम के लिये किसे दोषी ठहराया जाये। होटल, रेस्टोरेन्ट संचालको को, या फिर इसमे लिप्त युवक युवतियो को, या पुलिस को जिसके हाथ मे रहता है कानून का डंडा ? ज्ञात हो कि शहर मे कई स्थानो पर सैक्स रेकट चलने की बाते आये दिन सुनाई देती है। इसमे शामिल चेहरो की बात करे तो सर्वप्रथम बह चेहरे सामने आते है जो होटल, गेस्टहाउस, रेस्टोरेन्ट संचालको का मुखोटा पहने हुये होते है। इन स्थानो के किरायो मे बेहताशा बृद्वि ओर खाने की मनमानी कीमत बसूलने के बाद इस व्यवसाय मे होने वाले लाभ इनको धन का लालची बना देता है। ओर यह लोग धन के लालच मे भटकती युवा पीढी को बिगाडने मे पूरा सहयोग करने के लिये अपने स्थानो पर गोपनीय रूप से तीन सौ रूपये घंटे के हिसाब से जगह उपलब्ध कराने की व्यवस्था करके अपने को भडूआ बना देते है। इन स्थानो पर सुबह 10 बजे से साय 4 बजे तक जो लडके लडकी आते है उनको खाने पीने का सामान सर्वे करने वाला बेटर इनके बीच होने वाली बातचीत से सब अंदाजा लगा लेता है। ओर गोपनीय कमरा उपलब्ध होने की बात कान मे फुसफुसाकर बताता है। इस बात को सुनते ही बिगडेल लडका-लडकी उसको हां कहते ही वह उन्हें कमरे मे पहुचा देता है। उस कमरे मे मनचाही बस्तु दुगने से तीगुने रेटो पर उपलब्ध कराई जाती है। अधिक पेसा लेने का बिरोध लडका नही करता बल्कि बेटर को टिप के रूप मे सौ रूपये की पत्ती अलग से देकर एकान्त ओर सुरक्षा उपलब्ध कराने हेतु धन्यवाद भी देते है। इस कमाई मे होटल संचालक समय-समय पर चेकिंग हेतु आने वाले खाकी बालो की सेवा भी करता है जो कि गंदे धंधे को बढावा देने का काम करते है। देखा जाये तो एक तरह से ऐसे लोग युवा पीढी को बर्बाद करने के लिये पूर्ण रूप से दोषी है। बात इस गंदे धंधे मे लगे युवाओ के बारे मे की जाये तो इनमे एक वह बर्ग है जो कि टीवी पर आने वाले कार्यक्रमो के असर का शिकार होकर कालेज टाइम मे उन राहो पर चल बैठता है जो सीधे उसे गंदे दलदल मे धकेलता है। कालेजो मे पढने के लिये आने वाले युवको मे से बिगडेले छात्र पहले तो किसी छात्रा को अपनी लच्छेदार बातो मे फंसाकर  उसे प्यार का पाठ पढाने हेतु इन रेस्टोरेन्टो मे दावत पर ले जाता है। ओर दावत से शुरू हुआ प्यार का खेल हवस के गंदे शौक तक पहुच जाता है। इस मंहगे शौक को पूरा करने के लिये पढकर अपना भबिष्य बनाने की उम्र मे युवक अपना नाम अपराध की दुनिया से जोडकर अपना भबिष्य दांव पर लगा बैठता है। इस धंधे मे दूसरा पहलू है वह युवतियां जो अपने मंहगे शौको को पूरा करने के लिये रहीस बाप के बेटो को फसाकर उनके साथ हवस का खेल धन की लालच मे खेलती है। ओर इस लालच मे बह बदनामी की चादर इस तरह से ओढ बैठती है। कि उन्हें पता ही नही रहता कि उनका मित्र कौन ओर सौदागर कौन है। तीसरा बर्ग इस तरह की लडकियो को एकत्रित कर  सेक्स रेकिट संचालको का है जो कि अपने चगुलं मे फसी लडकियो की ब्लू क्लीपिगं अपने पास रखकर उन्हें शहर से बाहर तक भेजते है। ओर रहीसबाप के बेटो को इनके साथ हमबिस्तर होने पर क्लीपिगं बनाकर उन्हे ंलगातार ब्लेकमेलिगं करते है। इस तरह के एक नही कई रेकिट शंहर मे सचालित होने की चर्चाये है। इस हवस के  खेल को बंद कराने के लिये खाकी पर कानून का डन्डा है। लेकिन यह डडां अब कानून का पालन कराने की भाषा को भुलाकर खाकी के लिये नोट छापने की मशीन का काम करता है। क्योकि जहां पर ऐसे घिनोने खेल को पकडने हेतु जब खाकी बाला डंडा लेकर पहुचता है तो वहां चादी की चमक मे बह अपने कर्तव्य को भुला बैठता है।