नई दिल्ली| पश्चिम बंगाल में जीत के बाद तृणमूल कांग्रेस के दूसरे राज्यों में विस्तार की कोशिशों से कांग्रेस खुश नहीं है। पार्टी का मानना है कि तृणमूल कांग्रेस की इन कोशिशों से विपक्षी एकता की कोशिशों को झटका लग सकता है। कांग्रेस के कई बड़े नेता पिछले कुछ माह में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए हैं। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, पार्टी तृणमूल कांग्रेस के दूसरे राज्यों में विस्तार से ज्यादा नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल करने से नाराज है। हाल ही में असम की वरिष्ठ नेता सुष्मिता देव और गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री लिजिन्हो फ्लेरो अपने समर्थकों के साथ तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए हैं।
कांग्रेस पार्टी नेता ने कहा कि सुष्मिता देव से ज्यादा कांग्रेस नेतृत्व को लिजिन्हो फ्लेरो को लेकर तृणमूल से नाराजगी है। क्योंकि, फ्लेरो के तृणमूल में जाने से पार्टी का चुनावी गणित बिगड़ गया है। इसके साथ पार्टी को डर है कि तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी गठबंधन कर उसकी मुश्किल बढ़ा सकते हैं। गोवा में पंजाब, यूपी और उत्तराखंड के साथ विधानसभा चुनाव है। कांग्रेस को चुनाव में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी। वर्ष 2017 की तरह किसी तरह की लापरवाही न हो, इसलिए पार्टी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम को चुनाव पर्यवेक्षक भी नियुक्त किया है। पर तृणमूल ने पूरा गणित बिगाड़ दिया है।

वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 17 सीट के साथ 30 फीसदी वोट मिला था। पर अपनी पहली कोशिश में ही आम आदमी पार्टी करीब साढ़े छह फीसदी वोट हासिल करने में सफल रही थी। गोवा कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि चुनाव से पहले फ्लेरो के भरोसेमंद कई और नेता पार्टी छोड़ सकते हैं।

मेघालय में संगमा को मना टूट से बची पार्टी
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि तृणमूल की नजर मेघालय पर भी है। मेघालय में भी पूर्व मुख्यमंत्री मुकुल संगमा 13 विधायकों के साथ तृणमूल जा सकते थे। इसलिए, पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने फौरन संगमा को दिल्ली तलब कर उनकी नाराजगी को दूर किया, ताकि मेघालय में पार्टी को टूट से बचाया जा सके।