भोपाल । पोषण आहार वितरण में होने वाले फर्जीवाड़े को रोकने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस व्यवस्था में बदलाव कर दिया है। अगले माह से शहरी और ग्रामीण आजीविका मिशन व तेजस्विनी समूह आंगनवाड़ी केंंद्रों में गर्म खाना परोसेंगे। विभाग ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। अभी तक स्थानीय स्तर पर बनने वाले समूह यह जिम्मेदारी संभाल रहे थे। वहीं सरकारी पोषण आहार कारखानों का संचालन महिला स्व-सहायता समूहों से कराने का फैसला भी अगले हफ्ते हो सकता है।
प्रदेश में 97 हजार 135 आंगनवाड़ी केंद्र हैं। इनमें सूखा और गर्म पोषण आहार बच्चों को दिया जाता है। सूखा पोषण आहार एमपी एग्रो के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों तक पहुंचता है, तो गर्म खाना स्थानीय स्तर पर तैयार कर बच्चों, गर्भवती महिलाओं को दिया जाता है। अभी तक कलेक्टर की अनुशंसा से स्थानीय स्तर पर समूहों को यह जिम्मेदारी सौंपी जाती है, पर अब ऐसा नहीं होगा। विभाग ने तय कर दिया है कि अब सिर्फ शहरी और ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत पंजीकृत या तेजस्विनी समूह ही यह काम कर पाएंगे। ऐसा वर्तमान में काम कर रहे समूहों द्वारा गड़बड़ी करने के कारण किया जा रहा है।
10 केंद्रों का बनेगा समूह
एक स्व-सहायता समूह 10 आंगनवाड़ी केंद्रों के समूहों को गर्म खाना उपलब्ध कराएगा। इसके लिए आंगनवाड़ी केंद्रों के समूह बनाए जाएंगे और फिर बाकायदा निविदा बुलाकर उन्हें काम सौंपा जाएगा। इन समूहों से कैसा खाना आ रहा है, वह पर्याप्त मात्रा में है या नहीं आदि निगरानी पर्यवेक्षकों को सौंपी जाएगी।
कारखाने भी चलाएंगे समूह
सरकार ने दो साल पहले सात पोषण आहार कारखाने तैयार किए हैं, जो फिलहाल एमपी एग्रो संचालित कर रहा है। जिन्हें महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपने का फैसला अगले हफ्ते हो सकता है। सूत्र बताते हैं कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का यह प्रस्ताव कैबिनेट के लिए भेज दिया गया है। अगले हफ्ते होने वाली कैबिनेट की बैठक में इस पर मुहर लग सकती है। उल्लेखनीय है कि पोषण आहार व्यवस्था में ठेकेदारों की दखलंदाजी खत्म करने के लिए वर्ष 2017 में शिवराज सरकार ने महिला स्व-सहायता समूहों से पोषण आहार तैयार करने का फैसला लिया था। इसके लिए वर्ष 2018 में देवास, धार, होशंगाबाद, शिवपुरी, सागर, रीवा और मंडला में पोषण आहार उत्पादन के लिए सरकारी कारखाने खोलने का निर्णय लिया गया। ये कारखाने वर्ष 2020 में बनकर तैयार हुए। इससे पहले ही कांग्रेस सरकार इन कारखानों को संचालित करने की जिम्मेदारी एमपी एग्रो को सौंप चुकी थी।

इनका कहना है

स्थानीय स्तर पर बच्चों को गर्म खाना देने की व्यवस्था है। यह काम अब शहरी और ग्रामीण आजीविका मिशन या तेजस्विनी समूहों से कराया जाएगा। अगले माह से प्रदेशभर में ये व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।
अशोक शाह, प्रमुख सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग