नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली में बजट सत्र में बजट पेश होने के बाद सीमा पर डटे किसानों के आंदोलन में जहां चाक-चौबंद सुरक्षा की तेजी दिखाई दे रही है। संसद में भी किसानों की लड़ाई शुरू हो गई है। मंगलवार को राज्यसभा में विपक्षी दलों ने किसानों की मांग पर चर्चा के लिए जमकर नारेबाजी की। सरकार विरोधी नारे लगाए और कृषि कानून वापस लेने की आवाज उठाई। लेकिन चर्चा नहीं की गई। सुबह से ही हंगामा होता रहा और तीन बार कार्यवाही स्थगित होने के बाद दोपहर 12.30 बजे जब सदन शुरू हुआ तो फिर जय जवान, जय किसान के नारे लगने लगे। ये हंगामा देखते हुए राज्यसभा की कार्यवाही बुधवार सुबह 9 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। 
सरकार वार्ता को तैयार-
लोकसभा की कार्यवाही पांच बजे फिर शुरू हुई। इस दौरान लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने फिर से किसान आंदोलन का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान 150 से ज्यादा किसानों की जान चली गई। ऐसा लगता है कि हम फिर से ब्रिटिश काल में जा रहे हैं। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि सरकार किसान संगठनों से बात कर रही है। वहीं कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सरकार संसद के अंदर और बाहर किसानों के मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। आज के प्रश्नकाल में भी किसान के मुद्दे से जुड़े कई सवाल हैं। लेकिन विपक्ष सदन की कार्यवाही का समय बर्बाद कर रहा है। 
कांग्रेस का फैसला- लोकसभा में किसानों पर हल्ला बोल-
कांग्रेस की संसदीय दल की मंगलवार को बैठक हुई। इसमें फैसला किया गया कि किसान आंदोलन को लेकर कांग्रेस लोकसभा में चर्चा की मांग भी करेगी। पार्टी ने पहले से ही स्थगन प्रस्ताव दिया हुआ है। लोकसभा में विपक्ष किसान आंदोलन का मामला उठाएगा और इससे हंगामे के आसार हैं।  
कृषि कानून वापस लो, कांग्रेस सांसदों की मांग-
कृषि कानूनों की वापसी की मांग को लेकर कांग्रेस के सांसद संसद परिसर में स्थित महात्मा गांधी की मूर्ति के सामने प्रदर्शन कर रहे हैं।  
लोकसभा में कार्यवाही स्थगित-
राज्यसभा के बाद लोकसभा की कार्यवाही भी शाम पांच बजे तक स्थगित कर दी गई है। विपक्ष के हंगामे के बाद लोकसभा की कार्यवाही स्थगति कर दी गई। विपक्ष कृषि कानूनों पर बहस कराये जाने की मांग कर रहा है।