सुप्रीम कोर्ट में फिजिकल सुनवाई की मांग:500 से ज्यादा वकीलों ने CJI एसए बोबडे को लिखी चिट्‌ठी, बोले- वर्चुअल सिस्टम पूरी तरह फेल

सुप्रीम कोर्ट में फिजिकल सुनवाई को फिर से शुरू करने की मांग को लेकर 500 से ज्यादा वकीलों ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) एसए बोबडे को चिट्ठी लिखी है। चिट्‌ठी में कहा गया है कि CJI तुरंत शीर्ष कोर्ट में फिजिकल सुनवाई शुरू करने के निर्देश दें, क्योंकि फिलहाल चल रही वर्चुअल सुनवाई की व्यवस्था पूरी तरह से फेल हो चुकी है।

पिछले साल में मार्च में कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह से सुप्रीम कोर्ट समेत देश की सभी कोर्ट में वर्चुअल सुनवाई करने को मंजूरी दी गई थी। अब वकीलों ने अपनी चिट्ठी में दलील दी कि देश की कई हाईकोर्ट में फिजिकल सुनवाई शुरू हो गई है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को भी कोरोना से बचाव के तरीकों को सख्ती से अपनाने के साथ फिजिकल सुनवाई को फिर से शुरू करना चाहिए।

कई महत्वपूर्ण मामले लंबित रह जाते हैं

सुप्रीम कोर्ट के वकील कुलदीप राय, अंकुर जैन और अनुभव की ओर से CJI को लिखी गई 5 पेज की चिट्‌ठी पर 500 से ज्यादा वकीलों के दस्तखत हैं। चिट्‌ठी में कहा गया, 'मेंशनिंग ब्रांच हमारे कॉल का जवाब नहीं देती है, जिस वजह से कई महत्वपूर्ण मामले लंबित रह जाते हैं। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि क्या ये मामले नए हैं या नोटिस के बाद सुनवाई पर आने वाले हैं। जमानत के मामलों समेत नागरिकों के जीवन और स्वतंत्रता से संबंधित कई मामलों पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता होती है, लेकिन उन पर भी सुनवाई नहीं हो पाती है, जिस वजह से वादी और वकील हालात के आगे असहाय हो जाते हैं।'

चिट्‌ठी के जरिए वर्चुअल सुनवाई से होने वाली दिक्कतों के बारे में बताया

नेटवर्क कनेक्टिविटी

वर्चुअल सुनवाई के संबंध में रजिस्ट्री द्वारा कोई उचित प्रबंध नहीं
हैंड मेंशनिंग ब्रांच में संबंधित अधिकारियों द्वारा कॉल का जवाब नहीं दिया जाता
वजह बताए बिना ही मेंशनिंग ब्रांच तत्काल मामलों की मेंशनिंग को खारिज कर देती है
आर्थिक तंगी की वजह से 50% से अधिक युवा वकील दिल्ली छोड़ने के लिए मजबूर हो चुके हैं
 

युवा प्रैक्टिसनर्स सबसे ज्यादा परेशान

चिट्‌ठी में यह भी बताया कि बार के मेंबर्स खासतौर पर युवा प्रैक्टिसनर्स पिछले 10 महीनों से कोरोना महामारी और सुप्रीम कोर्ट की वर्चुअल सुनवाई के बीच काफी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। वकीलों ने लिखा कि अटॉर्नी जनरल और यहां तक कि कई न्यायाधीश भी वर्चुअल सिस्टम की कार्यप्रणाली पर अपनी नाराजगी व्यक्त कर चुके हैं।