राजधानी में कोरोना का आंकड़ा बेतहाशा बढ़ा और दहशत फैली, लेकिन अब इसी आंकड़ों का राज भी फूटने लगा है। जिले में स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख कार्यालय यानी सीएमओ दफ्तर जांच-पड़ताल के बाद इस नतीजे पर पहुंचा है कि राजधानी और आसपास ऐसे 2692 मरीज हैं, जो एक बार संक्रमित होने पर कोरोना मरीजों की लिस्ट में शामिल किए गए। लेकिन इसके बाद उन्होंने जितनी बार भी टेस्ट करवाया और पाजिटिव आए, तो उन्हें नए केस में शामिल कर लिया गया और इस तरह मरीज संख्या बढ़ गई।
कोरोना मरीजों की इस आंकड़ेबाजी ने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां तक कि खुद सीएमओ डा. मीरा बघेल ने भी माना है कि इस वजह से यहां मरीजों की संख्या ज्यादा दिख रही है और रिकवरी रेट कम है। इस खुलासे ने जिले के स्वास्थ्य अमले में खलबली मचा दी है। दरअसल यह बात भी आ रही है कि किसी ने एंटीजन टेस्ट करवाया और पाजिटिव आया, तो वह कोरोना के नए केस में शामिल कर लिया गया।

घपला सिर्फ यही नहीं है। इनमें से 1672 लोग तो ऐसे हैं, जिनके नाम, उम्र और पता समान था, फिर भी नए केस में शामिल कर लिए गए। जबकि ये रिपीट टेस्ट था, जिससे मरीजों की संख्या नहीं बढ़नी थी। भास्कर को कुछ डाक्टरों ने ही बताया कि अधिकांश कोविड पाजिटिव मरीजों का रिपीट टेस्ट होता है। होम आइसोलेशन में रहनेवाले तो 10 से 14 दिन के बाद दोबारा टेस्ट करवा ही रहे हैं। ये कभी एंटीजन से टेस्ट करवाते हैं, फिर संतुष्ट नहीं होते तो ट्रू नाॅट और आरटीपीसीआर टेस्ट भी करवा लेते हैं। इनमें से कुछ तो रिपीट टेस्ट के कारण रिपोर्ट नहीं होते, लेकिन 27 सौ मामले ऐसे हैं, जो रिपीट टेस्ट के बावजूद नए केस में शामिल हो गए।

जांच फ्री, इसलिए भी ऐसा
पूरे प्रदेश में सरकारी लैब व जांच सेंटरों में कोरोना की जांच मुफ्त हो रही है। निजी अस्पताल और लैब ही शुल्क ले रहे हैं। सरकारी लैब में फ्री जांच होने के कारण ही लोग बार-बार टेस्ट करवा रहे हैं। सीएमओ दफ्तर ने इस बात का खुलासा भी किया है कि कुछ लोग मोबाइल नंबर बदल-बदलकर टेस्ट करवा रहे हैं, इसलिए दोबारा या तीसरी बार भी पाजिटिव आने के बाद नए केस में शामिल हो रहे हैं। इसका बड़ा नुकसान यह भी हो रहा है कि रिपीट टेस्ट की वजह से ऐसे लोगों का टेस्ट नहीं हो पा रहा है, जो जरूरतमंद हैं।

ऐसे 95 फीसदी निगम सीमा के
रिपीट टेस्ट करवाने वालों में रायपुर नगर निगम क्षेत्र के लोग की संख्या 90 फीसदी से ज्यादा है। धरसीवा, अभनपुर व तिल्दा ब्लॉक के लोग कम हैं। बिरगांव नगर निगम के लोगों की संख्या भी दो अंकों में ही है। रायपुर निगम का ऐसा कोई भी जोन नहीं है, जहां लोगों ने रिपीट टेस्ट ना कराया हो। सूची के अध्ययन से पता चला कि शहरी लोग ही रिपीट टेस्ट करवाने में बहुत आगे हैं। इस सूची में कई नाम ऐसे भी हैं, जिनके पते अज्ञात हैं।प्रदेश में अभी तक 15 ऐसे केस आए हैं, जो अस्पताल या होम आइसोलेशन से स्वस्थ होने के बाद दोबारा संक्रमित हुए हैं। इनमें डीआईजी ओपी पाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के फॉरेंसिक मेडिसिन की एचओडी व उनके डॉक्टर पति समेत अन्य लोग शामिल हैं। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि यह रिपीट केस में गिना जाएगा। अंबेडकर अस्पताल के सीएमओ भी महीने भर बाद दोबारा संक्रमित हुए हैं।

रायपुर में कुल मरीज

कुल मरीज - 30741
स्वस्थ - 19600
एक्टिव - 10780
मौत - 364

क्या है गाइडलाइन
अगर कोई मरीज अस्पताल में भर्ती है और इस दौरान उनकी जांच की जाती है तो यह रिपीट टेस्ट में आएगा। इसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर नए केस में गिनती नहीं होगी। होम आइसोलेशन पूरा होने के बाद बिना लक्षण के दोबारा टेस्ट कराने पर भी, रिपीट टेस्ट कहा जाएगा। ऐसी रिपोर्ट भी नए केस में गिनती नहीं होगी। वर्तमान में कई लोग बार-बार टेस्ट करा रहे हैं और पाजिटिव भी आ रहे हैं। रायपुर में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ने में इसका योगदान तो है ही, अब यह बातें भी उठ रही हैं कि प्रदेश में यह संख्या कितनी हो सकती है?

एक्सपर्ट व्यू - जरूरतमंदों के टेस्ट नहीं हो पा रहे हैं
"यह सही है कि कई मरीज बार-बार टेस्ट करवा रहे हैं और पाजिटिव हो रहे हैं। ये ऐसे लोग हैं जिनकी अस्पताल से छुट्टी हुई या होम आइसोलेशन पूरा कर चुके। शरीर में कोरोना के डेड वायरस रहते हैं, जिसके कारण 3 महीने तक फॉल्स पॉजिटिव रिपोर्ट आ सकती है। रिपीट टेस्ट के बारे में स्पष्ट है कि ये नए केस नहीं हैं। दूसरा, इससे जरूरतमंदों के टेस्ट नहीं हो पा रहे हैं।"