मप्र में प्रवासी अन्य श्रमिकों के साथ निम्न आय वर्ग के लोगों को अब सरकार के एलआईजी-ईडब्ल्यूएस मकान किराए पर मिलेंगे। ये वो मकान हैं, जो राजीव गांधी आवास योजना और जेएनएनयूआरएम के तहत बनने के बाद से रिक्त पड़े हैं। राज्य सरकार इन्हें पीपीपी मॉडल पर संचालित करेगी। कैबिनेट ने आत्म निर्भर भारत अभियान के पैकेज-2 के अंतर्गत अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग स्कीम को मंगलवार को मंजूरी दे दी। यह स्कीम एक लाख की आबादी वाले शहरों में लागू होगी। फिलहाल रिक्त पड़े मकान इंदौर, ग्वालियर और सागर में हैं। इनकी संख्या 500 है। स्कीम में उन्हीं रिक्त मकानों को लिया जा रहा है, जो पूरे टावर में खाली हों।

नगरीय विकास मंत्री भूपेंद्र सिंह ने बताया कि पीपीपी मॉडल में निजी संस्था को 25 साल के लिए पूरा टावर दिया जाएगा। इसके मेंटेनेंस संचालन का जिम्मा फर्म का होगा। वह गरीबों से वाजिब न्यूनतम किराया लेगी। किराया अधिक हो, इस पर विभाग नजर रखेगा। इस स्कीम में एक और मॉडल रखा जाएगा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी जमीन पर एलआईजी और ईडब्ल्यूएस बनाना चाहे और किराए पर श्रमिकों को दे तो अप्रोच रोड, पेयजल के साथ सीवेज अन्य मूलभूत सुविधाएं सरकार मुहैया कराएगी। इसका नियमानुसार शुक्ल लिया जाएगा। इस स्कीम का फायदा यह होगा कि मकान रिक्त नहीं रहेंगे और गरीबों को पक्के मकानों में रहने को मिलेगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब स्कीम लागू करने के लिए केंद्र के शहरी मंत्रालय के और मध्यप्रदेश शासन के बीच मेमोंरेंडम ऑफ एग्रीमेंट होगा। हस्ताक्षर नगरीय विकास एवं आवास विभाग करेगा।