• नए कानून में असामाजिक तत्वों को कम से कम 7 और अधिक से अधिक 10 साल तक की सजा का प्रावधान है।
  • सीएम रूपाणी असामाजिक तत्वों को गुजरात छोड़ने की चेतावनी देने के साथ बुधवार को कैबिनेट में अध्यादेश पेश करेंगे।

राज्य सरकार ने पासा एक्ट में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। प्रदेश में असामाजिक तत्वों पर कड़ी कार्रवाई करने के लिए नए कानून को गुंडा एक्ट एंटी सोशल एक्टीविटीज प्रिवेन्शन एक्ट अध्यादेश के माध्यम से अमल में लाने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री विजय रूपाणी असामाजिक तत्वों को गुजरात छोड़ने की चेतावनी देने के साथ बुधवार को कैबिनेट में अध्यादेश पेश करेंगे।

10 साल तक की सजा का प्रावधान

नए कानून में असामाजिक तत्वों को कम से कम 7 और अधिक से अधिक 10 साल तक की सजा और 50 हजार जुर्माने का प्रावधान है। शराब का अवैध कारोबार, जुआ, गाे हत्या, नशे का कारोबार, अनैतिक व्यापार, मानव तस्करी, बालकों का जातीय शोषण, नकली शराब की बिक्री, सूदखोरी, जमीन हड़पने, अपहरण, अवैध हथियार रखने वालों के खिलाफ इस कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। असामाजिक तत्वों की व्याख्या में व्यक्तिगत अथवा ग्रुप में हिंसा की धमकी देने अथवा अन्य प्रकार से सार्वजनिक व्यवस्था को क्षति पहुंचाने के उद्देश्य से काम करने वाले भी सजा के पात्र होंगे।

एमपी, एमएलए में से 25% के खिलाफ क्रिमिनल केस

ज्ञातव्य है कि एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफोर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 26 में से 4 और कुल 182 में से 47 यानी कि एमपी, एमएलए में से 25% के खिलाफ क्रिमिनल केस हैं। प्रस्तावित गुंडा एक्ट में संशोधन करके अन्य मामलों को भी इसमें शामिल किया गया है।

नए एक्ट में ये अपराध
शराब, नशीले पदार्थ, हानिकारक औषधि का सेवन करना, उत्पादन करना, हेराफेरी करना अथवा तो आयात-निर्यात के मामलों को भी इसमें शामिल किया है। स्थाई संपत्ति हड़पने, फर्जी दावा और दस्तावेज बनाने जैसे मामलों में भी कानून प्रभावी होगा। महिलाओं से अनैतिक व्यापार, बाल संरक्षण अधिनियम के मामले, सामुदायिक संवाद में खलल, हिंसा करने, आतंक फैलाने, रंगदारी के इरादे से अपहरण करने के मामलों में भी गुंडा एक्ट लागू होगा। यह प्रावधान भी है कि असामाजिक तत्वों की संपत्तियों को जिला मजिस्ट्रेट अपने कब्जे में ले सकेंगे। नए कानून में गवाहों की सुरक्षा के प्रावधान के साथ गुंडों की मदद करने वाले सरकारी कर्मचारियों काे भी 3 से 10 साल की सजा हो सकती है।

गुंडा एक्ट की खास बातें: गवाहों की जानकारी गुप्त होगी

  • आम जनता को परेशान करने और कानून व्यवस्था भंग करने वाले असामाजिक तत्वों को 7 से 10 साल की सजा और 50 हजार जुर्माना होगा।
  • ऐसे मामलों में आरोपियों को तीन साल से कम सजा न हो इसे भी ध्यान में रखा जाएगा।
  • राज्य सरकार अध्यादेश जारी करके कानून को अमल में लाएगी।
  • व्यक्तिगत अथवा ग्रुप में अभद्र वर्ताव करने, सार्वजनिक शांति भंग करने अथवा असामाजिक प्रवृत्ति करने वालों पर गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई होगी।
  • रुपए वसूलने के लिए परेशान करने, धमकी देने, पशुओं की तस्करी करने वालों पर इस एक्ट के तहत कार्रवाई होगी।
  • स्पेशल कोर्ट का गठन होगा। इससे जुड़े पुराने केसों को भी कोर्ट में ट्रांसफर किया जाएगा।
  • गुंडा एक्ट में गवाहों की जानकारी गुप्त रखने का भी प्रावधान है।
  • कोर्ट को असामाजिक तत्वों की संपत्ति जब्त करने का अधिकार होगा।
  • स्पेशल कोर्ट का गठन होगा, आरोपी की मौजूदगी जरूरी नहीं

केसों को तत्काल निपटाने के लिए स्पेशल काेर्ट के गठन का प्रावधान किया गया है। जरूरत पड़ने पर निर्धारित स्थल के बदले दूसरी जगह भी कोर्ट की कार्रवाई हो सकेगी। इससे जुड़े पुराने केस स्पेशल कोर्ट में ट्रांसफर हो जाएंगे। जरूरत पड़ने पर इसको निपटाने के लिए एक स्पेशल कोर्ट को दूसरी स्पेशल कोर्ट में तब्दील करने का भी प्रावधान है। आरोपी के खिलाफ दूसरी कोर्ट में केस चल रहा हो तो उसकी मौजूदगी जरूरी नहीं होगी।

गुंडा एक्ट के प्रावधान और उसके विस्तार को देखते हुए पुलिस द्वारा इसके दुरुपयोग होने की भी संभावना है। सरकार ने इसे ध्यान में रखते हुए कानून में प्रावधान किया है कि कोई भी मामला दर्ज करने से पहले संबंधित रेंज आईजी अथवा पुलिस कमिश्नर की मंजूरी लेनी जरूरी होगी।