• गणपति की 700 से 1000 मूर्तियां बेचने वाले अब तक 150- 200 ही बेच सके, दो फीट से बड़ी मूर्ति बनाने पर प्रतिबंध
  • ढोल, डीजे, मिठाई, फूल विक्रेता और मंडप डेकोरेटर्स के हाथ से निकल रहा कारोबार का बड़ा सीजन

पिछले साल शहर में गणेश की 75 हजार से अधिक छोटी-बड़ी मूर्तियां स्थापित की गई थी। इस साल कोरोना महामारी की वजह से बड़ी मूर्तियां स्थापित करने की मंजूरी नहीं दी जा रही है। लोग अपने घरों में मंगलमूर्ति स्थापित करके पूजा-अर्चना करेंगे। गणेशोत्सव में केवल पांच दिन ही बचे हैं। कोरोना से शादी के बाद मंडप-डेकोरेटर्स की सबसे बड़ी सीजन फेल हो गई है। ढोल, डीजे, मिठाई और फूल बेचने वालों के कारोबार पर भी असर पड़ेगा।

शहर के अडाजण, घोड दौड़ रोड, वराछा, कतारगाम, पार्ले प्वाइंट, ताड़वाड़ी, गोपीपुरा, भटार समेत इलाकों में मूर्तिकारों की बिक्री घट गई है। कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए सोसाइटियाें और आयोजकों को गणेश की बड़ी मूर्तियां न स्थापित करने का निर्देश दिया गया है। मूर्ति बेचकर जीवन यापन करने वालों की हालत सबसे ज्यादा खराब है। अंबानगर के पास मंडप लगाकर मूर्ति बनाने वाले बप्पनभाई ने बताया कि कोरोना की वजह से बंगाल के कारीगर सूरत नहीं आए। मैंने गणेश की 150 मूर्तियां बनाई है, पर अभी तक 1000 से कम कीमत की केवल 25 मूर्तियां ही बिकी हैं।

डर: बंगाल के कारीगर और भावनगर से मिट्‌टी नहीं आई

गोपीपुरा में वर्षों से गणेश की मूर्ति बनाने और बेचने वाले विशाल सोनी ने बताया कि कोरोना के डर से बंगाल से कारीगर नहीं आए। ट्रांसपोर्ट बंद होने के कारण भावनगर से मूर्ति बनाने वाली मिट्‌टी भी नहीं आई। इस साल बड़ी मूर्तियां नहीं बनाई है। छोटी मूर्तियों की बिक्री भी बहुत कम है। पिछले साल 700 मूर्तियां बिकी थी। इस साल अब तक केवल 150-200 ही बिक पाई है।

असर: मुंबई से मूर्ति लाते थे, इस साल सादगी से मनाएंगे

भटार में गणेशोत्सव का बड़ा आयोजन करने वाले कमलभाई ने बताया कि पिछले एक दशक से मुंबई से लाल बागचा राजा की मूर्ति लाकर पंडाल में स्थापित करते थे। इस साल बड़ा आयोजन नहीं करेंगे, बल्कि छोटी सी मूर्ति स्थापित करके सादगी से गणेशोत्सव मनाएंगे। वहीं, दो फीट से बड़ी और पीओपी की मूर्ति बनाने वालाें पर इस साल सख्त कार्रवाई होगी।

नुकसान: एक मंडप डेकोरेटर्स को 15 से अधिक ऑर्डर मिलते थे

मंडप डेकोरेटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ओजस पटेल ने बताया कि एसोसिएशन से 205 मंडप डेकोरेटर्स जुड़े हुए हैं। हर साल एक मंडप डेकोरेटर्स को 10 से 15 ऑर्डर मिलते थे। इस साल बड़े आयोजनों पर प्रतिबंध होने की वजह से एक भी ऑर्डर नहीं मिला है। मंडप डेकोरेटर्स की हालत बहुत खराब है। शादी के बाद गणेशोत्सव में सबसे ज्यादा कमाई होती थी।