पांडेसरा में काेराेना के केस बढ़ने के साथ ही महानगर पालिका ने दुकानदारों से अपील की थी कि वाे अपनी दुकानाें काे स्वैच्छिक लॉकडाउन के तहत बंद रखें, लेकिन दुकानाें काे जबरन बंद करवाने से नाराज कुछ दुकानदारों ने साेमवार काे खुद से दुकानें खाेल लीं। उनका कहना है कि स्वैच्छिक लॉकडाउन के नाम पर पालिका कर्मचारियाें द्वारा धमकाया जा रहा है। अलग-अलग जगह पर कॉरपोरेट लोगों के साथ बैठक कर स्वैच्छिक लॉकडाउन कराने की बात कह रहे हैं, लेकिन पांडेसरा में इसकी पोल खुल गई है और व्यापारी स्वैच्छिक लॉकडाउन की जगह पर खुद ही दुकान खोलकर व्यापार करने के लिए बैठ गए हैं, क्योंकि उनके मुताबिक अब इस तरीके से घर में बैठ पाना संभव नहीं है।

दलील है कि 2 महीने से दुकान और व्यापार बंद होने की वजह से अब घर चला पाना मुश्किल है यदि दुकानों को बंद करना है तो इसके लिए सरकार की तरफ से घोषणा की जाए, लेकिन डराकर अब दुकानों को न बंद कराया जाए। दुकानदारों ने कहा कि आदेश की कॉपी लेक आओ फिर हम दुकान बंद रखेंगेे। 

सोमवार को धीरे-धीरे सभी दुकानें खुल गईं, लाेग सड़क पर भी निकलने लगे

पांडेसरा के अलग-अलग इलाकों में दुकानों को महानगर पालिका की तरफ से स्वैच्छिक लॉकडाउन का नाम देकर बंद करवाया गया था। लेकिन, शनिवार को बंद कराई दुकानों को साेमवार से खोल दिया। कुछ व्यापारियों के सामने आ जाने से व्यापारियों को भी ताकत मिली और सभी ने मिलकर अब व्यापार को शुरू कर दिया है। कपड़े की दुकानों से लेकर सड़क पर पूरी तरीके से लोगों की आवाजाही और सब्जी भी धड़ल्ले से बेची जा रही है। इससे पहले महानगर पालिका के कर्मचारी शनिवार काे दुकानदारों को दुकान बंद करने के लिए कहा था, जिसमें 11 दुकानदारों काे चेतावनी भी दी थी कि अगर दुकान दोपहर 12 बजे के बाद खोली गई तो कार्रवाई की जाएगी।

दुकानदाराें ने कहा- जब काेई आदेश ही नहीं है ताे दुकान को कैसे बंद रखें

व्यापारियों का कहना है कि महानगर पालिका के कर्मचारी शनिवार को आए थे। उन्हाेंने कहा कि कोरोना केस बढ़ने की वजह से दुकान बंद रखना हाेगा। जब हमने इसका विराेध किया ताे पालिका कर्मचारियाें ने धमकी भी दी। लेकिन, किसी ने भी किसी आदेश की कॉपी या फिर पत्र नहीं दिखाया। कई दुकानदारों ने इस मामले में महानगर पालिका के कर्मचारी से बात करने की कोशिश भी की लेकिन वाे बस दुकान बंद करने की धमकी देकर चले गए। इसके लिए न तो राज्य सरकार की तरफ से न ही केंद्र सरकार की तरफ से कोई आदेश दिया गया है। व्यापारियों के मुताबिक बंद करना स्वैच्छिक नहीं जबरन था।