भोपाल।कोरोना संक्रमण के कारण चल रहे लॉकडाऊन में चार माह तक लोक निर्माण विभाग के अनुबंधित ठेकेदारों पर निर्माण कार्य नहीं कर पाने के कारण कोई पेनाल्टी नहीं लगेगी। इस संबंध में राज्य शासन ने आदेश जारी कर दिये हैं।
राज्य के लोक निर्माण विभाग के सचिव पीसी बारस्कर ने प्रबंध संचालक मप्र सडक़ विकास निगम, प्रमुख अभियंता लोनिवि तथा परियोजना पीआईयू को आदेश जारी कर कहा है कि कोविड-19 संक्रमण के फलस्वरुप लॉकडाऊन होने के कारण निर्माण कार्यों की गति प्रभावित हुई है। लोनिवि में वर्तमान में प्रचलित अनुबंधों में फोर्स मेसर यानि अप्रत्याशित घटना का प्रावधान है। इसलिये फोर्स मेजर के अंतर्गत मान्य कर अनुबंधों में निहित प्रावधान के अंतर्गत आवेदन प्राप्त होने पर बगैर पेनाल्टी के चार माह तक की समय-वृध्दि मान्य की जाये। यह अवधि प्रथम लॉकडाऊन लागू होने की तिथि 25 मार्च 2020 से प्रारंभ होकर चार माह तक प्रभावशील होगी। लोनिवि सचिव बारस्कर ने अपने आदेश में आगे कहा है कि यदि किसी विशिष्ट प्रकरण में चार माह से अधिक अवधि मान्य की जाना हो तो इस संबंध में अनुबंध के प्रावधानों के अंतर्गत सक्षम अधिकारी द्वारा गुण-दोष के आधार पर निर्णय लिया जा सकता है। यदि किसी अनुबंध विशेष में ऐसा नहीं माना जाना हो तो इस आशय का प्रस्ताव केस टु केस बेसिस पर प्रकरण शासन को औचित्य सहित प्रस्तुत किये जायें। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।


मेडिको लीगल संस्थान में नियुक्त होगा प्रशासनिक अधिकारी
राज्य के गृह विभाग के अधीन भोपाल के शासकीय महात्मा गांधी मेडिकल कालेज भवन में स्थित मेडिको लीगल संस्थान में अब प्रशासनिक अधिकारी नियुक्त होगा। यह प्रशासनिक अधिकारी 15 वर्ष की सेवा का अनुभव रखने वाला मंत्रालय का अनुभाग अधिकारी या विभागाध्यक्ष कार्यालय का अधीक्षक हो सकेगा अथवा सात वर्ष का अनुभव रखने वाला राज्य लेखा सेवा का अधिकारी भी हो सकेगा।


यह है मामला :
दरअसल मेडिको लीगल संस्थान में प्रशासनिक अधिकारी का राजपत्रित पद स्वीकृत है तथा इसे पदोन्नति से भरे जाने का नियमों में प्रावधान है। चूंकि संस्थान में पिछले पांच साल से ऐसा कोई अधिकारी नहीं है जिसे प्रशासनिक अधिकारी के पद पर पदोन्नत किया जा सके, इसलिये संस्थान के निदेशक डा. अशोक कुमार शर्मा ही इस पद का कार्य देख रहे हैं। इससे उन पर काफी वर्क लोड है। उल्लेखनीय है कि मेडिको लीगल संस्थान ही संदिग्ध मौत वाले सभी पुलिस प्रकरणों में पोस्टमार्टम का कार्य करता है तथा इसकी रिपोर्ट पर ही पुलिस मेडिको लीगल केस फाईल करती है।


केविड से मृतकों का नहीं हो रहा पोस्टमार्टम :
मेडिकोलीगल संस्थान में कोविड-19 से मरे लोगों का पोस्टमार्टम नहीं हो रहा है। इस पर केंद्र के दिशा-निर्देशों अनुसार रोक लगाई गई है। यदि कोई पुलिस प्रकरण वाला केस है तो उसमें जरुर पोटमार्टम किया जा सकता है लेकिन अभी तक ऐसा कोई केस इस संस्थान में नहीं पहुंचा है। विभागीय अधिकारी ने बताया कि हमारे संस्थान में प्रशासनिक अधिकारी का पद लम्बे समय से खाली है तथा इसे पदोन्नति से भरे जाने हेतु कोई योग्य व्यक्ति भी नहीं है। चूंकि इसका काम भी निदेशक को ही देखना पड़ रहा है और इससे वर्क लोड बढ़ा है इसलिये राज्य सरकार से स्थानांतरण या प्रतिनियुक्ति से अधिकारी देने का प्रावधान करने का आग्रह किया गया था जिस पर राज्य सरकार ने यह प्रावधान कर दिया है। अब स्थानांतरण या प्रतिनियुक्ति से अधिकारी भेजने के लिये संबंधितों को पत्र लिखा जायेगा। संस्थान में अब तक ऐसा कोई पुलिस केस नहीं आया है जिसमें मृतक कोविड-19 ग्रस्त हो और उसका पोस्टमार्टम करना हो। यदि ऐसा केस आया तो पीपीई किट पहल कर उसका पोस्टमार्टम किया जायेगा।
डॉ. नवीन जोशी