• कमलनाथ‑दिग्विजयसिंह की अनबन उजागर…
  • दिग्गी की आपत्ति के बाद प्रवक्ता से जारी कराया खंडन
  • उपचुनाव की रणनीति से दूर रखा दिग्गी को

भोपाल। मप्र कांग्रेस की राजनीति में अंदरखाने में काफी उठापटक चल रही है। दोनों पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजयसिंह के बीच खाई बढ़ती जा रही है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रति झुकाव रखने वाले प्रभारी महासचिव दीपक बावरिया की छुट्टी कराने के बाद यह कहा जाने लगा है कि कांग्रेस में कमलनाथ के निशाने पर अब दिग्विजयसिंह हैं।
कल कमलनाथ के इस बयान पर हंगामा मचा कि दिग्विजयसिंह के झूठे आश्वासन के कारण सरकार गिरी। कमलनाथ 6 घंटे तक अपने इस बयान पर अड़े रहे, लेकिन जब दिग्विजयसिंह ने फोन करके आपत्ति जताई, तब देर शाम पार्टी के एक प्रवक्ता के जरिए खंडन जारी किया गया। पार्टी में चर्चा है कि कमलनाथ खेमा सरकार गिरने का पूरा दोष दिग्विजयसिंह पर मढऩा चाहता है। कमलनाथ के बयान के बाद दिग्विजयसिंह समर्थक अपनी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के इस सार्वजनिक बयान को लेकर खफा दिखे। पार्टी के आम कार्यकर्ताओं में भी संदेश गया कि सिंधिया के पार्टी के बाहर होने के बाद कमलनाथ और दिग्विजयसिंह के बीच खाई बढ़ती जा रही है। बताया जाता है कि देर शाम दिग्विजयसिंह ने चुप्पी तोड़ते हुए स्वयं कमलनाथ को फोन लगाकर उनके बयान पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद कमलनाथ ने स्वयं बयान वापस लेने के बजाय अथवा इस बयान का ट्वीट कर खंडन करने के बजाय कांग्रेस प्रवक्ता नरेन्द्र सलूजा से स्पष्टीकरण जारी कराया कि उन्होंने दिग्विजयसिंह पर सीधा आरोप नहीं लगाया है।
उपचुनाव की रणनीति से दूर रखा दिग्गी को
कांग्रेस के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि पिछले 40 दिन से कमलनाथ प्रदेश की 24 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की रणनीति बना रहे हैं। वे प्रदेश के कांग्रेस नेताओं को फोन कर भोपाल बुलाकर उनसे चर्चा भी कर रहे हैं, लेकिन मात्र एक किलोमीटर दूर रह रहे दिग्विजयसिंह को न तो इस दौरान किसी मीटिंग में बुलाया गया और न ही उनसे कोई सलाह की गई। यह भी चर्चा है कि कमलनाथ के निवास पर होने वाली अधिकांश बैठकों में सरकार गिराने को लेकर सारा दोष दिग्विजयसिंह को दिया जा रहा है।