भोपाल,मध्यप्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन ने मुख्यमंत्री पद से कांग्रेस नेता कमलनाथ का इस्तीफा शुक्रवार को मंजूर कर लिया। कमलनाथ ने आज दोपहर करीब सवा एक बजे मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंपा था। सूत्रों ने बताया, ‘‘मध्यप्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन ने मुख्यमंत्री कमलनाथ का इस्तीफा मंजूर कर लिया है और उन्हें नये मुख्यमंत्री के कार्यभार ग्रहण करने तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहने के लिए कहा है।’’ मालूम हो कि ज्योतिरादित्या सिंधिया के कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होने के बाद मध्यप्रदेश में कांग्रेस के 22 बागी विधायकों के 11 मार्च को विधायक के पद से अपना त्यागपत्र देने से सियासी संकट पैदा हुआ। इनमें से छह के इस्तीफे विधानसभा अध्यक्ष ने तुरंत कर लिये थे, जबकि 16 बागी विधायकों के इस्तीफे कल देर रात को मंजूर हुए थे। इससे कमलनाथ की सरकार अल्पमत में आ गई थी। इसके बाद उच्चतम न्यायालय द्वारा मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष एन. पी. प्रजापति को शक्ति परीक्षण के लिये शुक्रवार को सदन का विशेष सत्र बुलाये जाने और यह प्रक्रिया शाम पांच बजे तक पूरी करने के निर्देश दिये जाने के बाद कमलनाथ ने फ्लोर टेस्ट से बचने के लिए यह इस्तीफा दिया है। शक्ति परीक्षण के लिए मध्यप्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र शुक्रवार दोपहर दो बजे बुलाई गई थी, लेकिन कमलनाथ ने इससे करीब 40 मिनट पहले ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।

'जनता कभी BJP को माफ नहीं करेगी'

सीएम कमलनाथ ने कहा कि हमने तीन बार विधानसभा में अपनी बहुमत साबित की. बीजेपी की ओर से जनता के साथ विश्वासघात किया जा रहा है और लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या की जा रही है, जनता इन्हें कभी माफ नहीं करेगी. कमलनाथ ने कहा कि बीजेपी ने मेरे कार्यकाल के दौरान हमारे कार्यों के खिलाफ साजिश की, पहले दिन से ये लोग हमारी सरकार गिराना चाहते थे.

कमलनाथ ने गिनाई अपनी उपलब्धियां

इस्तीफे के ऐलान से पहले मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिनवाया और कहा कि हमने आम लोगों के लिए काम किया, लेकिन ये भाजपा को रास नहीं आया. हमारी सरकार पर किसी तरह का आरोप नहीं लगा. बीजेपी ने किसानों के साथ धोखा कियास लेकिन हमें उनके लिए काम नहीं करने दिया.

क्या है पूरा मामला

इससे पहले कांग्रेस के 22 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था, जिसमें से 6 विधायकों का इस्तीफा स्पीकर ने स्वीकार कर लिया था और 16 विधायकों का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया था. बीजेपी ने सरकार से सदन में बहुमत साबित करने की मांग की थी, लेकिन मांग को दरकिनार करते हुए स्पीकर ने 26 मार्च तक सदन को स्थगित किया गया था.

इसके बाद बीजेपी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी और तुरंत फ्लोर टेस्ट की मांग की गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को स्पीकर को फटकार लगाई थी और 16 बागी विधायकों के इस्तीफे ना स्वीकारने का कारण पूछा और आज शाम 5 बजे तक फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दिया था. इसके बाद स्पीकार ने सभी 16 विधायकों का इस्तीफा स्वीकार कर लिया.

विधायकों का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई. अब कमलनाथ सरकार के पास सिर्फ 99 विधायक हैं, जबकि बहुमत के लिए 104 का आंकड़ा चाहिए. फ्लोर टेस्ट से पहले कमलनाथ ने इस्तीफे का ऐलान कर दिया है. यानी मध्य प्रदेश से कांग्रेस सरकार की विदाई हो गई है.