भोपाल. मध्य प्रदेश में सियासी संकट खड़े होने पर मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamal Nath) ने बीजेपी (BJP) पर जमकर हमला बोला. उन्होंने बीजेपी के 15 साल के शासन पर कई गंभीर आरोप लगाए. कमलनाथ ने कहा कि, ‘ये वही लोग हैं जो पिछले 15 साल में बीजेपी के राज में पनपे और उनका संरक्षण पाकर पोषित हुए. रेत माफिया ने तो बीजेपी राज में 15 हजार करोड़ का डाका मध्य प्रदेश के राजस्व पर डाला. मेरे मुख्यमंत्री बनने के बाद रेत माफिया की भी कमर टूट गई. नापाक इरादे रखने वाले लोगों को यह रास नहीं आया.’ उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी माफिया के हाथ का खिलौना बन गई है. एमपी में सोमवार को अचानक बुलाई गई मंत्रिमंडल की बैठक में 28 में से 20 मंत्रियों ने कमलनाथ को अपना इस्तीफा सौंप दिया लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक 8 मंत्रियों ने अभी तक अपना इस्तीफा सीएम को नहीं दिया है. साथ ही सिंधिया समेत इन बागी मंत्रियों सहित 27 विधायकों के मोबाइल फोन सोमवार शाम से बंद हो गए.

15 साल में माफिया बन गया था समानांतर सरकार

सीएम ने आगे कहा कि, ‘भूमाफिया से त्रस्त मध्य प्रदेश की जनता को हमने राहत दिलाई. नकली दवाएं, नकली खाद बेचकर, लाभ कमाकर अमानवीय व्यवसाय में लगे माफिया के खिलाफ हमने अभियान चलाया. लोगों को प्रतिदिन उपयोग में आने वाली वस्तुएं शुद्ध मिले इसके लिए ‘शुद्ध के लिए युद्ध’ अभियान चलाया. उन्होंने कहा कि सौदेबाजी की राजनीति मध्य प्रदेश के हितों के साथ कुठाराघात है. उन्होंने कहा कि, ‘15 साल के बीजेपी राज में हर क्षेत्र में माफिया समानांतर सरकार बन गया था. प्रदेश की जनता त्रस्त थी और उसने माफिया रूप से छुटकारा पाने के लिए कांग्रेस को सत्ता सौंपी. मैंने जनता की अपेक्षा पर माफिया के खिलाफ अभियान चलाया. माफिया के सहयोग से बीजेपी कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रही है.’

‘मैंने हमेशा मूल्यों की राजनीति की है’


कमलनाथ ने कहा, ‘जाहिर है बीजेपी का जनाधार खिसकना शुरू हो गया था. बीजेपी ने पिछले माहों में सात राज्यों में अपनी सरकार गंवा दी. इससे बौखलाकर कांग्रेस सरकार को पांच साल पूरा न करने देने की कुत्सित और घिनौनी कोशिश पहले दिन से ही शुरू हो गई थी.’ उन्होंने कहा, ‘मैंने हमेशा मूल्यों की राजनीति की है. उससे मैं कभी समझौता नहीं कर सकता. बीजेपी  मध्य प्रदेश के भविष्य के साथ भी धोखा कर रही है और प्रदेश के विकास की असीम संभावनाओं को भी आघात पहुंचा रही है.’

सिंधिया खेमे के 27 विधायकों ने बंद किए मोबाइल फोन

मुख्यमंत्री ने यह मंत्रिमंडल की बैठक मध्य प्रदेश के हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और राज्यसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में सोमवार दोपहर दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर भोपाल लौटने के तुरंत बाद की. सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री कमलनाथ अपना दिल्ली दौरा बीच में छोड़कर सोमवार देर शाम भोपाल आए थे. मध्य प्रदेश कांग्रेस के विभिन्न गुटों में चल रही कथित अंदरूनी लड़ाई और कमलनाथ नीत प्रदेश सरकार को कथित रूप से बीजेपी द्वारा अस्थिर करने के आरोपों के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया, उनके समर्थक मंत्रियों सहित 27 विधायकों के मोबाइल फोन सोमवार शाम अचानक बंद हो गए. अनुमान लगाया जा रहा है कि सिंधिया को मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नियुक्त करने के लिए पार्टी आलाकमान पर दबाव बनाने के लिहाज से ऐसा किया गया है.

हालांकि, इस बारे में ज्योतिरादित्य सिंधिया से मोबाइल फोन पर बार-बार संपर्क करने की असफल कोशिश की गई. कमलनाथ के दिल्ली से लौटने से पहले ही सिंधिया एवं उनके समर्थक इन बागी मंत्रियों सहित 27 विधायकों के मोबाइल फोन बंद हो गए. माना जा रहा है कि अपनी सरकार पर चल रहे इसी संकट के मद्देनजर कमलनाथ ने यह बैठक बुलाई थी. सिंधिया समर्थित जिन मंत्रियों के मोबाइल फोन बंद हैं, उनमें लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तुलसी सिलावट, श्रम मंत्री महेन्द्र सिंह सिसोदिया, राजस्व एवं परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी, खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर एवं स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी शामिल हैं. इनके अलावा, सिंधिया समर्थक अन्य विधायकों से भी मोबाइल पर संपर्क नहीं हो पा रहा है.