कोलकाता, मुंबई,देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने लैंगिक समानता के प्रयास के तहत अपने समलैंगिक कर्मचारियों के पार्टनर्स को भी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी देगी। सिर्फ यही नहीं, अगर ऐसे कर्मचारी अपना सर्जरी के जरिए अपना लिंग परिवर्तन (सेक्स/जेंडर रीअसाइनमेंट सर्जरी) करवाने की लागत की आधी रकम कंपनी ही देगी जो अधिकतम दो लाख रुपये तक हो सकती है। लैंगिक समानता की दिशा में यह बड़ा कदम उठाने वाली टीसीएस, टाटा समूह की पहली कंपनी हैं। कंपनी में 4 लाख कर्मचारी पेरोल पर हैं।
स्पाउस की परिभाषा में किया बदलावअपने कर्मचारियों को भेजे गए ई-मेल में TCS ने कहा है कि नए बदलावों से LGBT (लेजबियन, गे, बाइसेक्सुअल तथा ट्रांसजेंडर) कर्मचारियों को फायदा होगा। कंपनी की नई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में 'स्पाउस' की जगह 'पार्टनर' शब्द का इस्तेमाल किया गया है, जिसके कारण समलैंगिक पार्टनरों को इंश्योरेंस कवर देने का रास्ता साफ हो चुका है।
 कुछ कंपनियां लिव-इन पार्टनर को दे रही यह सुविधा
कुछ प्रगतिशील कंपनियां समलैंगिक पार्टनरों को पहले से ही मेडिकल कवर/फैमिली हेल्थ इंश्योरेंस की सुविधा उपलब्ध करा रही हैं, जिनमें आरबीएस इंडिया, सिटी बैंक, कैपजेमिनी इंडिया सहित कई अन्य कंपनियां शामिल हैं। इनमें से कुछ कंपनियों ने तो लिव-इन पार्टनर को भी पॉलिसी का लाभ मुहैया कराया है।
लिंग परिवर्तन कराने को 2 लाख रुपये देगी कंपनी
टीसीएस के ग्लोबल डायवर्सिटी हेड प्रीति डी'मेलो ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि नई पॉलिसी को बीते सप्ताह औपचारिक प्रारूप दिया गया। अब स्पाउस की परिभाषा में समलैंगिक पार्टनरों को भी शामिल किया जाएगा, जिसमें उनकी वैवाहिक स्थिति कोई मायने नहीं रखेगी। नई पॉलिसी के तहत सर्जरी करवाकर लिंग चेंज कराने में आने वाली लागत का 50% (अधिकतम 2 लाख रुपये) इंश्योरेंस द्वारा कवर किया जाएगा।
 व्यक्ति का सम्मान कंपनी के मूल्यों में से एक
डी'मेलो ने कहा, 'किसी भी व्यक्ति का सम्मान टीसीएस के अहम मूल्यों में से एक है और इसी मूल्य के तहत हमने LGBTQ+ के समावेशन का सफर बरकरार रखा है। हम ऐसा संगठन बनाने में विश्वास रखते है जहां हर कोई खुद को समावेशित और सम्मानित महसूस करता हो। हम अपने यहां माहौल को पारदर्शी और सबके अनुकूल बनाना चाहते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी को लिंग परिवर्तन कराने के लिए सर्जरी का एक आवेदन भी मिल चुका है।