अजमेर. राजस्थान में पक्षियों (Birds) के मरने का सिलसिला बदस्तूर जारी है. सांभर झील (Sambhar Lake) में हजारों की संख्या में पक्षियों की मौत के बाद अब अजमेर की आनासागर झील (Anasagar lake of Ajmer) किनारे एक साथ डेढ़ दर्जन से ज्यादा मृत कौवे (Dead crows) मिले हैं. कौवों की मौत से हड़बड़ाए वन विभाग (Forest department) ने आनन-फानन में वहां से मृत कौवों को हटवाया और उन्हें पशु चिकित्सालय भिजवाया. वहां कौवों का पोस्टमार्टम करवाया गया है. प्रथम दृष्टया माना जा रहा है कि कौवों की मौत जहरीला दाना (Poisonous seeds) खाने से हुई है. लेकिन मामले की पूरी जांच के लिए कौवों का विसरा भोपाल लैब में भेजा जाएगा. वहीं वन मंत्री ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं.
भोपाल भिजवाया जाएगा विसरा
जानकारी के अनुसार घटना शुक्रवार को सुबह की बताई जा रही है. आनासागर झील के पास एक साथ 19 कौवे मृत पड़े मिले. इसकी सूचना मिलते ही वन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और हालात को देखकर तत्काल पशुपालन विभाग के कर्मचारियों को बुलाया. सूचना पर पुलिस भी वहां पहुंची. कर्मचारियों ने तत्काल मृत कौवों को वहां से उठाकर पशु चिकित्सालय भिजवाया. वहां उनका पोस्टमार्टम कर विसरा लिया गया.
मौत का कारण जहरीला दाना !
प्रारंभिक जांच में कौवों की मौत का कारण जहरीला दाना माना जा रहा है. मामले की तह तक जाने के लिए कौवों के विसरा को जांच के लिए भोपाल लैब में भिजवाया जाएगा. वहां से रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल पाएगा. वहीं वन एवं पर्यावरण मंत्री सुखराम बिश्नोई ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है. मामले की विस्तृत जांच के लिए डीएफओ को निर्देशित किया गया है.
सांभर में मरे थे करीब 20 हजार से ज्यादा पक्षी
उल्लेखनीय है कि हाल में जयपुर की सांभर झील में करीब 20 हजार से ज्यादा पक्षियों की मौत हो गई थी. वहां पक्षियों की मौत का कारण एवियन बोटुलिज्म बताया गया है. इस मामले में हालात बेकाबू होने पर सीएम अशोक गहलोत को हस्तक्षेप करना पड़ा था. सीएम अशोक गहलोत ने खुद इसकी पुष्टि करते हुए कहा था कि पक्षियों की मौत के मामले में बरेली से रिपोर्ट आ चुकी है. सांभर में पक्षियों की मौत की वजह एवियन बोटुलिज्म बताई गई है. इस मामले में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को चिट्ठी लिखी है. सीएम गहलोत ने कहा था कि पक्षियों की मौत के मामले में केंद्र सरकार के पास ही विशेषज्ञ हैं, केंद्र को सांभर विशेषज्ञ भेजने चाहिए.