अजमेर। घरेलू हिंसा के मामले में प्राय: महिलाएं इसकी शिकार होती देखी जाती हैं तथा कानून, समाज और पुलिस तीनों उनकी मदद के लिए तत्पर रहती हैं। मगर आठ महीने पहले पत्नी की प्रताडऩा से पीडि़त होकर आत्महत्या करने वाले पंकज के मामले में स्थिति बिलकुल उलट है, इस मामले में पीडि़त पुरूष जहां एक तरफ जान से हाथ धो बैठा वहीं उसके सुसाइड नोट में सीधे तौर पर पत्नी प्रियंका को जिम्मेदार ठहराने के बावजूद आठ महीने की अवधि में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया। आदर्शनगर इलाके में आठ महीने पहले 28 साल के पंकज साहू पुत्र रामपाल साहू ने फांसी के फंदे पर लटक कर इसलिए मौत को गले लगा लिया था, क्योंकि वह पत्नी की हरकतों से परेशान था। पंकज ने मरने से पहले सुसाइड नोट में अपनी पीड़ा लिखी थी।
उसने अपने पिता को संबोधित करते हुए लिखा था कि मुझे माफ करना, मेरी पत्नी ने काफी गलतियां की हैं, उसे काफी समझाने के बावजूद वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही, मैं उसके साथ नहीं रहना चाहता। पापा मुझे माफ करना और सबका ध्यान रखना। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने इस सुसाइड नोट को बोगस करार देते हुए मामले में एफआर लगा दी थी, लेकिन मृतक के परिजनों ने आईजी से न्याय की गुहार कर मामले की जांच नए सिरे से कराई। इस जांच में पुलिस ने सुसाइड नोट की एफएसएल जांच कराई है, इसकी रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि हस्तलिपि मृतक पंकज की ही है, लेकिन इसके बावजूद पुलिस आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में पंकज की पत्नी प्रियंका को गिरफ्तार नहीं कर रही।  मृतक पंकज के पिता रामपाल साहू ने आईजी को दिए शिकायत पत्र में बताया है कि उसके पुत्र पंकज ने 9 अक्टूबर 2018 को बहू प्रियंका की धमकियों से परेशान होकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट में पंकज ने यह लिखा है। भीलवाड़ा निवासी प्रियंका पुत्री धनराज अपने रिश्तेदार जमना लाल के साथ मिलकर झूठे मामले में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दे रही थी।  पंकज इससे काफी परेशान था। मजबूरन उसने मौत को गले लगा लिया। साहू ने बताया कि आईजी के आदेश से मामले की डीएसपी विजयसिंह ने नए सिरे से जांच कर आदर्शनगर थाना पुलिस को फाइल भेज दी। पुलिस ने कोर्ट में भी मामले की प्रगति रिपोर्ट में यह बताया है कि मामले में आरोपी की गिरफ्तारी शेष है।