पानीपत। राष्ट्रीय स्वयं सेवक (आरएसएस) के नेता बलराम नंदवानी के दो प्लॉट के ट्रांसफर विवाद में बतौर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के चेयरमैन को हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर पेश होने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री इसके चेयरमैन हैं इसलिए खुद या उनके प्रतिनिधि पेश होंगे। 

कोर्ट ने पूछा है कि 5 साल पुराने आदेश पर अमल क्यों नहीं हुआ

  1.  

    आरएसएस नेता सेक्टर-7 के प्लॉट को सेक्टर-12 या 24 में बदलवाना चाहते हैं। सेक्टर-12 और 24 में प्लॉट महंगे हैं, इसलिए कोई अफसर विवाद में नहीं फंसना चाहते हैं। प्लॉट ट्रांसफर करने के पक्ष में पॉजिटिव रिपोर्ट लिखने के कारण एचएसवीपी के ईओ दीपक घणघस सस्पेंड हो चुके हैं।

     

  2.  

    हाईकोर्ट ने 30 मई को एचएसवीपी के चेयरमैन सीएम सहित सभी अफसरों को नोटिस जारी कर उपस्थित रहने को कहा है। कोर्ट ने पूछा है कि पांच साल पुराने आदेश पर अमल क्यों नहीं हुआ। स्पष्ट कर दिया है कि सुनवाई तक अगर मामला नहीं सुलटता है तो विलंब की कीमत चुकानी होगी। 

     

  3.  

    मामला 5 साल पुराना है। 28 मई 2014 को हाईकोर्ट ने प्लॉट अलॉट करने का आदेश था। सेक्टर-12 निवासी आरएसएस नेता बलराम नंदवानी के परिवार के नाम से सेक्टर-7 में दो-दो एकड़ वाले दो प्लॉट 530ए और 530बी अलॉट हुए। नंदवानी परिवार से रूपा नंदवानी ने कोर्ट में केस डाला था कि प्लॉट के नजदीक से हाई पावर बिजली के तार गुजरते हैं। इसलिए, प्लॉट बदलवाया जाए। 

     

  4.  

    एचएसवीपी के अफसरों ने कहा कि प्लॉट बदलने का विचार कर रहे हैं। नहीं बदला गया नंदवानी ने अवमानना की याचिका लगा दी। साथ ही कहा कि यह 2019 है। लेकिन, एचएसवीपी के अफसर अब कह रहे हैं कि प्लॉट ट्रांसफर का अधिकार चेयरमैन के पास है। मुख्यमंत्री एचएसवीपी के चेयरमैन हैं। इसलिए हाईकोर्ट ने चेयरमैन को ही नोटिस जारी किया है। 

     

  5. सेक्टर-12 या 24 में कीमत ज्यादा इसलिए हुआ विवाद

     

    नंदवानी का तर्क है कि एचएसवीपी वालों ने सेक्टर-7 के प्लॉट के पास से गुजर रहे हाई पावर लाइन को बदलवाने का भरोसा दिया था। लाइन नहीं हटाने पर दूसरा प्लॉट देने की बात कही, लेकिन 5 साल बीतने के बाद भी हाई कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया। चूंकि, सेक्टर-7 में प्लॉट की कीमत कम है और सेक्टर-12 व सेक्टर-24 में प्लॉट की कीमत ज्यादा है। इसलिए एचएसवीपी के अफसर इस विवाद में नहीं फंसना चाहते हैं। इसी विवाद में तत्कालीन ईओ दीपक घणघस निलंबित हो चुके हैं। क्योंकि, घणघस ने प्लॉट ट्रांसफर में गलत रिपोर्ट बनाई थी।