नई दिल्ली । सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (सीबीआईसी) ने दूसरे चरण के लॉकडाउन के दौरान दो हफ्ते के भीतर ही करीब 10 हजार करोड़ रुपए के जीएसटी रिफंड और ड्यूटी ड्रॉ बैक को मंजूरी दे दी है। इसमें निर्यातकों खासकर छोटे और मझोले कारोबारियों का रिफंड सबसे ज्यादा है। हालांकि स्टेट जीएसटी विभागों की ओर से निपटारे में देरी की शिकायतें अब भी बरकरार हैं। बताया जा रहा है ‎कि 8 से 23 अप्रैल के बीच चलाए गए स्पेशल रिफंड डिस्पोजल ड्राइव में कुल 10,733 करोड़ रुपए के रिफंड क्लियर किए गए। इसमें 9818.12 करोड़ रुपए जीएसटी और आईजीएसटी रिफंड के हैं, जबकि 915.56 करोड़ रुपए कस्टम और ड्यूटी ड्रॉ बैक रिफंड से जुड़े हैं। कुल जीएसटी के 1.07 लाख और कस्टम व ड्यूटी ड्रॉ बैक के 1.86 लाख आवेदनों को प्रोसेस किया गया है। इसके पहले मार्च के आखिरी और अप्रैल के पहले हफ्ते के दौरान 5 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के रिफंड दिए गए थे। सीजीएसटी दिल्ली जोन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया ‎कि सरकार की कोशिश रही है कि टैक्सपेयर्स, खासकर निर्यातकों और एमएसएमई की वर्किंग कैपिटल बाधित न हो, लेकिन लॉकडाउन ने उनकी माली हालत और खराब कर दी है। ऐसे में लंबित रिफंड का निस्तारण उनके लिए प्रोत्साहन का काम करेगा। निर्यातकों का कहना है कि केंद्रीय स्तर पर रिफंड में उतनी देरी नहीं हो रही है, जितना स्टेट लेवल पर हो रही है।