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Date 23-01-18

बीमार होती धरती को बचाने के लिए ऐसे करें अग्निहोत्र

By Khabarduniya :12-01-2018 08:51


सनातन काल से देश में यज्ञ की परंपरा रही है। कई सालों तक लोग इसे मात्र एक कर्मकांड मानते रहे हैं, लेकिन आधुनिक रिसर्च और अध्ययन से पता चला है कि अग्निहोत्र यत्र मानव स्वास्थ्य के साथ ही वायु, धरती और जल में होने वाले विकारों को दूर कर सकारात्मक बदलाव लाता है।

यजुर्वेद में कर्मकांड और यज्ञ विधान के बारे में विस्तार से लिखा गया है। यजुर्वेद में अग्निहोत्र यत्र के विधि-विधान के बारे में विस्तार से बताया गया है। अग्निहोत्र एक वैदिक यज्ञ है, जिसका वैदिक काल से बड़ा महत्व है।

अग्निहोत्र में सबसे जरूरी है 'समय का ध्यान'

अग्निहोत्र यज्ञ करना बेहद सरल है, लेकिन इसमें समय का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। अग्निहोत्र यज्ञ करते समय निर्धारित समय पर कोई परेशानी न हो, इसके लिए यज्ञ के पूर्व ही सारी तैयारी कर लेना चाहिए। वैदिक मान्यता को अनुसार, अग्निहोत्र यज्ञ सूर्योदय और सूर्यास्त के समय ही किया जाता है। इसलिए यज्ञ से पहले उस दिन के सूर्योदय और सूर्यास्त का निश्चित समय पंचाग के अनुसार जरूर देख लें।

अग्निहोत्र की जरूरी चीजें

ताम्र पात्र – पिरामिड की आकृति के कारण इस पात्र में विभिन्न प्रकार की ऊर्जा ग्रहण करने की क्षमता होती है। सूर्यास्त व सूर्योदय के समय सूर्य से निकलने वाली ऊर्जा ताम्र पात्र की विशिष्ट आकृति के कारण बिखरकर चौतरफा आकाश में समाहित होती है, जिसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

अखंड चावल – यज्ञ के लिए चावल लेते समय ध्यान रखें कि चावल अखंड होने चाहिए। पॉलिश किए हुए चावल न लें। यदि जैविक कृषि के जरिए पैदा किए हुए अखंड चावल मिल जाए तो ज्यादा बेहतर होगा।

गाय का घी - यह शुद्ध घी यज्ञ के समय अग्नि के लिए उत्प्रेरक का काम करता है। साथ ही सूर्य से मिलने वाली सकारात्मक ऊर्जा के लिए वाहक का काम करता है।

गाय के गोबर के उपले - यज्ञ के लिए गाय के गोबर के कंडे का ही इस्तेमाल करें। ध्यान रखें कि उपले बनाते समय गाय के गोबर में कंकड़, कचरा, पॉलिथीन आदि न हो और उन्हें साफ-सुथरी जगह पर बनाया गया हो। गाय के गोबर में 'एक्टिनोमिइसिटीज' नाम का सूक्ष्म जीवाणु काफी मात्रा में पाया जाता है।

जरूर बरतें ये सावधानियां

- ताम्र पात्र में अग्नि को फूंक मारकर प्रज्ज्वलित नहीं करना चाहिए।

- यज्ञ के दौरान तेल का इस्तेमाल बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए।

- आहुति देने के बाद लौ बुझने तक बैठे रहना चाहिए।

- रीढ़ की हड्डी को सीधा रखकर आहुति देना चाहिए।

ऐसे करें अग्निहोत्र

- सूर्योदय के 10 पहले तांबे के पात्र में उपलों को प्रज्ज्वलित करें।

- सूर्योदय से दो मिनट पहले अखंड चावल में घी मिलाकर रख लें।

- जैसे ही सूर्योदय या सूर्यास्त का समय हो, तत्काल चावल व अखंड चावल की आहुति दें।

- आहुति देते समय अग्निहोत्र के मंत्रों को तेज आवाज में उच्चारित करें।

अग्निहोत्र के मंत्र

सूर्योदय का मंत्र

सूर्याय स्वाहा सूर्याय इदम् न मम

प्रजापतये स्वाहा प्रजापतये इदम् न मम

सूर्यास्त का मंत्र

अग्नये स्वाहा अग्नये इदम् न मम

प्रजापतये स्वाहा प्रजापतये इदम् न मम’
 

Source:Agency

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