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Date 23-01-18

मप्र के सरकारी अस्पतालों में बंट रही अमानक एंटीबायोटिक दवाएं

By Khabarduniya :12-01-2018 08:44


भोपाल। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में बंटने वाले तीन अहम एंटीबायोटिक दवाएं अमानक मिली हैं। इनमें एक दवा की एक्सपायरी फरवरी 2018 है, जबकि जांच रिपोर्ट 31 अक्टूबर 2017 को जारी की गई है। ऐसे में साफ है कि ज्यादातर अमानक दवा मरीज खा चुके होंगे।

मप्र पब्लिक हेल्थ सप्लाई कॉरपोरेशन ने अब इन दवाओं का उपयोग रोकने के लिए सभी मेडिकल कालेजों के डीन व सभी जिलों के मुख्य चिकत्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों व सिविल सर्जन को पत्र लिखा है। अमानक मिलीं सभी दवाएं माडर्न लेबोरेट्रीज द्वारा बनाई गई हैं।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बालाघाट के स्टोर से स्टेट ड्रग लैब को सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। स्टेट ड्रग लैब से ये दवाएं अमानक मिली हैं। ये दवाएं सभी सरकारी अस्पतालों में सप्लाई होती हैं। इनमें दो दवाओं की एक्सपायरी इसी साल है।

ये दवाएं मिली अमानक

ओफ्लाक्सासिन (200 एमजी) और टिंडाजोल (600 , एमजी)- 28 अक्टूबर को जांच रिपोर्ट में यह दवा अमानक मिली। इसका बैच नंबर ओईटी 1701, निर्माण तिथि मार्च 2017 और एक्सपायरी फरवरी 2019 है।

उपयोग-दस्त व यूरिन इंफेक्शन के लिए। करीब 5 फीसदी मरीजों को यह दवा लगती है। बारिश के दिनों उपयोग चार गुना बढ़ जाता है।

ट्राइमेथाप्रिम (20 एमजी) एंड सल्फामेथाक्सीजोल (100 एमजी)- यह दवा स्टेट ड्रग लैब की 31 अक्टूबर की हुई जांच में अमानक मिली है। इसका बैच नंबर ओईटी 1602 है। मैनूफैक्चरिंग तारीख मार्च 2016 है। एक्सपायरी 2018 है।

उपयोग- एंटीबायोटिक दवा है। वायरल व बैक्टीरियल इंफेक्शन में उपयोग की जाती है। हर दूसरे-तीसरे मरीज को यह दवा दी जाती है।

ट्राइमेथाप्रिम (40 एमजी) एंड सल्फामेथाक्सीजोल (400 एमजी)- यह दवा स्टेट ड्रग लेबोरेट्री से 31 अक्टूबर की जांच में अमानक मिली है। दवा का बैच नंबर ओईटी 3701 है। दवा की मैनूफैक्चरिंग तारीख जनवरी 2017 व एक्सपायरी डेट दिसंबर 2018 है।

उपयोग- एंटीबायोटिक दवा है। वायरल व बैक्टीरियल इंफेक्शन के उपयोग की जाती है। हर दूसरे-तीसरे मरीज को यह दवा दी जाती है।

इस वजह से जांच में होती है देरी

स्टेट ड्रग लेबोरेट्री में अमला कम होने की वजह से दवाओं के सैंपल छह-छह महीने तक पड़े रह जाते हैं। दवाएं अमानक मिलने के बाद इसकी जानकारी भी मेल या फोन से न भेजकर पत्र से भेजी जाती है, जिसमें ज्यादा वक्त लग जाता है।

इस कारण अमानक होती हैं दवाएं

-दवा में पाउडर (एसे) की मात्रा कम हो, दवा रंग बदल गया हो, दवा फूट रही हो, दवा मिस ब्रांडेड हो यानी उसके ऊपर सभी जरूरी जानकारी नहीं लिखी हो।

इधर, इंजेक्शन से रिएक्शन की शिकायत

सिविल अस्पताल पांढुरना जिला छिंदवाडा के बीएमओ ने मप्र पब्लिक हेल्थ सप्लाई कॉरपोरशन को पत्र लिखकर बताया है कि आईवी नार्मल सलाइन, डेक्सट्रोज विद सलाइन व आयरन सुक्रोज इंजेक्शन का उपयोग करने के बाद मरीजों ने रिएक्शन होने की शिकायत की है। साथ ही इन दवाओं के उपयोग के संबंध में मार्गदर्शन मांगा है।

इनका कहना है

दवा बंटने के पहले उनकी दो बार एनएबीएल (नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर लेबोरेट्रीज) लैब से जांच की जाती है। इसके बाद भी गुणवत्ता जांच के लिए दवाओं के सैंपल स्टेट ड्रग लैब में भेजे जाते हैं। यहां दवाओं की जांच में देरी होती है। ऐसा प्रयास चल रहा है कि जांच रिपोर्ट जल्दी मिल जाए, जिससे दवाओं का उपयोग रोका जा सके।

विपिन श्रीवास्तव मुख्य महाप्रबंधक, मप्र पब्लिक हेल्थ सप्लाई कॉरपोरेशन 

Source:Agency

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