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Date 23-01-18

आदिवासी इलाकों में चुनाव से पहले बदले जाएंगे अफसर!

By Khabarduniya :04-01-2018 07:47


रायपुर। छत्तीसगढ़ में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले आदिवासी इलाकों में तैनात कई अफसर इधर से उधर होंगे। अफसरों की मनमानी की शिकायतें सामने आई हैं। खासकर बस्तर और सरगुजा में।

भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री सौदान सिंह के सामने सत्ता और संगठन के बीच समन्यव की कमी महसूस की गई। संगठन के बड़े नेता मान रहे हैं कि कुछ गड़बड़ियां सामने आई हैं।

अब प्रभारी मंत्रियों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे इसमें सुधार कर कार्यकर्ताओं का महत्व कायम करें। दरअसल चुनावी साल में भाजपा कार्यकर्ताओं की नाराजगी नहीं मोल लेना चाहती है। बस्तर में पिछले चुनाव में पार्टी 12 में से 8 सीटें हार गई थी। सरगुजा संभाग की 14 सीटों में से 7 कांग्रेस के कब्जे में है।

मुख्यालय अंबिकापुर में कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव का कद ऐसा है कि संगठन के लोगों को पार्टी के नेता ही उपेक्षित करते आए हैं। सौदान के सामने कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि यहां आने वाले मंत्री और दूसरे नेता कार्यकर्ताओं से मिलने की जगह सिंहदेव का महल देखने चले जाते हैं। बलरामपुर में दोनों सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है। यहां प्रशासन भाजपाइयों की सुनता ही नहीं है।

सबसे रोचक तो यह रहा कि एक तहसीलदार संगठन के लोगों से यह कहते फिर रहे हैं कि वे खुद ही भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ने वाले हैं। उन्हें टिकट मिल भी चुकी है। ऐसी स्थिति में कार्यकर्ताओं के मनोबल पर असर पर लाजिमी हैै। अब पार्टी संगठन इन मुद्दों का हल तलाशने में जुटी है। बस्तर में बैठक के दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा बीईओ, बीआरसी तक उनकी नहीं सुनते। आईएएस अधिकारियों की तो वे बात भी नहीं कर सकते।

बस्तर से सरकार के दो मंत्री हैं लेकिन नक्सल इलाके के पूर्व विधायक डॉ.सुभाऊ राम कश्यप का बंगला प्रशासन ने खाली करा दिया। एक परिवीक्षाधीन आईएएस अफसर जहां भी रहे भाजपाइयों के अवैध अतिक्रमण के खिलाफ ही मुहिम चलाते रहे। वर्तमान में उनका ट्रांसफर पखांजुर कर दिया गया है लेकिन बस्तर से वे फिर भी नहीं हटे हैं। जनपद पंचायतों के सीईओ सभी सरकारी काम दूसरों को दे रहे हैं।

कांग्रेसी हर जगह हावी हैं और सत्ता में रहने के बाद भी भाजपा कार्यकर्ताओं की नहीं सुनी जा रही है। सबसे ज्यादा दिक्कत निचले स्तर के अफसरों से है। प्रभारी मंत्री अब संगठन के लोगोंं से इन मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। सत्ता से जुड़े सूत्रों का कहना है कि चुनावी साल में बड़े पैमाने पर फेरबदल किया जा सकता है।

सरकार और संगठन का काम अलग है यह समझना होगा

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष धरम लाल कौशिक ने नईदुनिया से कहा कि पार्टी संगठन और सरकार का काम अलग-अलग है यह कार्यकर्ताओं को समझना होगा। जो दिक्कतें हैं उन्हें दूर करने की जिम्मेदारी प्रभारी मंत्रियों को दी गई है। किसी भी नेता की सारी बात कोई अफसर कहां सुनता है। अगर सही ढंग से संपर्क किया जाए तो काम होता है। मैं सरकार के काम में दखल कैसे दूं। अफसरों का ट्रांसफर होता रहता है, कार्यकर्ता स्थाई हैं। रूटीन ट्रांसफर में अफसर बदलेंगे।

Source:Agency

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