Breaking News

Today Click 73

Total Click 5085895

Date 24-11-17

बस्तर के जंगलों में पाए जाने वाले कंद-मूल पर होगा शोध

By Khabarduniya :13-11-2017 07:49


दंतेवाड़ा। बस्तर के जंगलों में पाए जाने वाले कंद-मूल और आदिवासियों ने अन्य जंगली भोज्य पदार्थों पर शोध होगा। इतना ही नहीं बस्तरिया बीयर सलफी पर भी कार्य किया जाएगा। प्राकृतिक रुप से पेड़ से निकलने वाले इस रस को अधिक समय तक प्रिजर्व करने पर कार्य होगा।

इसके लिए वैज्ञानिकों ने रुचि दिखाई है। 14 नवंबर को दंतेवाड़ा में होने वाले आदिवासी उद्यमिता सम्मेलन के बाद जिला प्रशासन के साथ डिफेंस फूड रिसर्च लैब अनुबंध करेगा।

जावंगा एजुकेशन सिटी में होने वाले वैश्विक उद्यमिता सम्मेलन में शामिल होने वाले देशी-विदेशी उद्यमियों के बीच बस्तर के आदिवासी उत्पाद का भी प्रदर्शन होगा। साथ ही यहां जैविक उत्पाद (धान, लघु धान्य), कड़कनाथ, शहद को बड़े शहरों में बिक्री के लिए कंपनियों के साथ अनुबंध होगा।

सम्मेलन में डिफेंस फूड रिचर्स लैब के अधिकारी और वैज्ञानिक भी शामिल होंगे। जिनकी रूचि बस्तर के जंगल में पाए जाने वाले औषधीय पौधे, आदिवासियों के भोज्य सामग्री और बस्तरिया बीयर सलफी पर है।

सूत्रों के मुताबिक रक्षा मंत्रालय के फूड रिसर्च लैब की टीम बस्तरिया बीयर सलफी को अधिक समय तक प्रिजर्व कर महानगर पहुंचाने पर शोध करेंगे। वहीं बस्तर के लोग जंगलों में अपनी बीमारियों पर जड़ी-बूटियों का किस तरह इस्तेमाल करते हैं और रोजना के भोजन में कौन-कौन से कंद-मूल और पत्तों का उपयोग करते है। इस पर भी शोध करेंगे।

सूत्रों की माने तो बस्तरिया बीयर को अधिक समय तक प्रिजर्व करने और कंद-मूल की विशेष पैकेजिंग के जरिए महानगर तथा विदेशों तक पहुंचाना है। ताकि बस्तर के आदिवासी उद्यमियों को इसका अधिक लाभ मिल सके। इसके लिए जिला प्रशासन स्वसहायता समूहों के जरिए संबंधित संस्था के साथ कार्य करेगा।

इनका कहना है

दंतेवाड़ा के सम्मेलन में विदेशी और देशी उद्यमी शामिल होंगे। इनमें कुछ बस्तर के उत्पाद को बाहर बाजार देने में रूचि रखते हैं। वे यहां निवेश कर स्थानीय उत्पादों पर रिचर्स और प्रोसेंगिक करेंगे। ताकि बस्तरिया उत्पाद पहचान बड़े शहरों में हो और हितग्राही को अधिक लाभ मिले। इस पर चर्चा पहले भी हो चुकी है। सम्मेलन के दिन विस्तृत चर्चा के बाद मूर्तरूप दिया जाएगा।

-सौरभ कुमार, कलेक्टर दंतेवाड़ा

Source:Agency

Sensex