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भावी पीढ़ी को सहेजने की पहल: रोटी-बेटी के संबंध में जुटे उत्तर-दक्षिण

By Khabarduniya :13-11-2017 06:35


वाराणसी । अपने सामाजिक ताने-बाने के खांचे में भावी पीढ़ी को सहेजने के लिए उत्तर और दक्षिण ने मिलन करने का फैसला लिया है। कन्याओं की कमी ने दक्षिण भारत के ब्राह्मण समाज को उत्तर भारत के अपने सजातीय बंधुओं से नाता जोड़ने की पहल कराई है। साथ ही उनका मकसद सजातीय विवाह को प्रोत्साहन देना है। इसीलिए तय हुआ है कि उत्तर और दक्षिण भारत का ब्राह्मण समाज आपस में रोटी-बेटी का संबंध बनाएगा। भाषा को लेकर आने वाली दिक्कतों को दोनों छोर के लोग मिलकर दूर कर लेंगे। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए मैसूर में विधिवत ‘गंगा-कावेरी सम्मेलन’ का आयोजन हुआ।

उत्तर-दक्षिण के इस मिलन की भूमिका कर्नाटक के ब्राह्मण समाज में कन्याओं की कमी और विजातीय (गैर ब्राह्मण) विवाह को देखते हुए बनी। पहले 18 सितंबर को कर्नाटक से काशी आए ब्राह्मण समाज के लोगों ने यहां इस परस्पर संबंध की नींव रखी तो सामाजिक इमारत को भव्यता देने के लिए शनिवार को काशी की केंद्रीय ब्राह्मण महासभा के प्रतिनिधि कर्नाटक के प्रमुख शहर मैसूर में थे। वहां शारदा विलास के सभागार में आयोजित गंगा-कावेरी समारोह में ब्राह्मण समाज के हजारों अभिभावक शामिल हुए। मैसूर के शिक्षाविद और विप्र परस्पर सहाय समिति के संस्थापक एचवी राजीव की ओर से यह पहल की गई, जिसमें वहां के पूर्व एमएलसी गोमधुसूदन आदि भी प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

इसी क्रम में बीते 18 सितंबर को कर्नाटक से उमा राजशेखर, श्रीनिवासन, डा. मल्लिका, डा. कोमला व वंदनाचार्य आदि का प्रतिनिधिमंडल काशी में था। बनारस के केंद्रीय ब्राह्मण महासभा की ओर से आयोजित समारोह में इस विषय को लेकर विशद चर्चा हुई और सभी का सम्मान भी किया गया। सिलसिले को आगे बढ़ाने के क्रम में केंद्रीय ब्राह्मण महासभा का प्रतिनिधि मंडल मैसूर पहुंचा। शनिवार को वहां आयोजित समारोह में महासभा की ओर से वरिष्ठ उपाध्यक्ष पं. कमलाकांत उपाध्याय, पं. सुरेंद्र प्रसाद तिवारी, डा. आरके उपाध्याय, अरविंद त्रिपाठी, पं. हरिशेवक द्विवेदी, पुष्पा उपाध्याय व इंदुलता शामिल हुईं।

केंद्रीय ब्राह्मण महासभा महासभा के नेता पं. कमलाकांत उपाध्याय के अनुसार, कर्नाटक में ब्राह्मण समाज की आबादी महज दो फीसद है, जिसमें कन्याओं की संख्या बेहद कम है। सामाजिक परिस्थितियों में आए बदलाव के चलते वहां के ब्राह्मण लड़कों के लिए कन्या तलाशना मुश्किल काम होता जा रहा है। कर्नाटक में जहां ब्राह्मणों की जनसंख्या महज दो फीसद है, वहीं महाराष्ट्र में करीब 11 और उत्तर प्रदेश में 17 फीसद है। पंडित कमलाकांत कहते हैं कि हम दहेजरहित और सजातीय विवाह की दिशा में उत्तर और दक्षिण भारत को निकट लाने के प्रयास में जुटे हैं।

मैसूर में गंगा-कावेरी सम्मेलन
-काशी की केंद्रीय ब्राह्मण महासभा और मैसूर के विप्र परस्पर सहाय समिति ने जोड़ा नाता
-सजातीय विवाह को प्रोत्साहन देने के लिए दक्षिण भारतीयों ने विकल्प पर बढ़ाए कदम
-कर्नाटक के लड़कों के लिए उत्तर भारत में होगी कन्याओं की तलाश

Source:Agency

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