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नक्सलियों की नाक में दम कर देते हैं स्नीफर डॉग ग्रेसी और जया

By Khabarduniya :07-11-2017 06:43


भिलाई । जितने वफादार, उससे कहीं ज्यादा जिम्मेदार। यहां के नेहरू नगर डॉग ट्रेनिंग सेंटर में दक्ष श्वान अब पुलिस वालों से भी दस कदम आगे चलते हैं। यहां के प्रशिक्षित श्वानों के हिस्से में कई उपलब्धियां हैं। बड़ी आपराधिक घटनाओं का राजफाश कराने में इनकी अहम भूमिका रही है। नक्सल क्षेत्रों में सैकड़ों बार यहां के स्नीफर डागों ने बम खोज निकाला जिससे ब्लास्ट होने से पहले इन्हें निष्क्रिय कर दिया गया।

आठ सौ से ज्यादा बम खोजे

डॉग ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षित श्वान, नक्सलियों के मंसूबों पर पानी फेरने में अहम साबित हुए हैं। यहां प्रशिक्षित डॉग नक्सल इलाकों में अब तक 800 से अधिक बम खोज चुके हैं। इन सभी बमों को निष्क्रिय किया जा चुका है।

सोच कर रूह कांप जाती है कि अगर इन बमों को न खोजा जाता तो अंजाम क्या होता। इतना ही नहीं, इन प्रशिक्षित श्वानों की वजह से 400 से ज्यादा चोरी, लूट और हत्या जैसे गंभीर अपराधों को सुलझाने में पुलिस को मदद मिली है।

डेढ़ सौ से ज्यादा श्वानों को मिला प्रशिक्षण

भिलाई में वर्ष 2006 से डॉग ट्रेनिंग सेंटर की शुरुआत हुई। अब तक इस सेंटर से करीब 150 डॉग्स प्रशिक्षित किये जा चुके हैं। इनमें से प्रदेश भर के 27 जिलों में पदस्थ 70 डॉग्स काम कर रहे हैं। सीएएफ सातवीं बटालियन के डॉग ट्रेनिंग सेंटर में अपराध को सुलझाने के लिए इन्हें खास ट्रेनिंग दी जाती है।

यहां पर जर्मन शेफर्ड, लेब्राडोर, डॉबरमैन और बेल्जियम शेफर्ड नस्ल के डॉग्स को प्रशिक्षण देकर उन्हें विस्फोटक, लाश और चोरी व लूट की घटना के बाद अपराधी तक पहुंचने की ट्रेनिंग दी जाती है।

दो साल से ला रहे बेल्जियम शेफर्ड

डॉग ट्रेनिंग सेंटर में पहले जर्मन शेफर्ड, लेब्राडोर और डॉबरमैन नस्ल के डॉग्स को प्रशिक्षण दिया जाता था लेकिन 2016 से बेल्जियम शेफर्ड नस्ल के डॉग्स को चुना जा रहा है। इसके पीछे खास कारण यह है कि ये श्वान काफी फुर्तीले होते हैं और इनकी उम्र भी बाकी नस्ल के डॉग्स की अपेक्षा ज्यादा होती है।

वर्तमान में पांच बेल्जियम शेफर्ड डॉग्स को ट्रेनिंग

डॉग ट्रेनिंग सेंटर में इस साल पांच बेल्जियम शेफर्ड डॉग्स को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन पांचों को निविदा प्रक्रिया के तहत हैदराबाद से खरीदा गया है। रॉली, रोजी, रीतू, लूसी और रोमी नाम के डॉग्स को उनके हैंडलरों के साथ प्रशिक्षण दिया जा रहा है। नौ महीने के प्रशिक्षण के बाद इनकी पदस्थापना होगी।

ट्रेनिंग के पहले मेडिकल चेकअप

डॉग स्क्वॉड में ट्रेनिंग के लिए चुने जाने वाले डॉग्स की अब सीधे पुलिस मुख्यालय से खरीद होती है। विभाग टेंडर जारी करता है। अभी ट्रेनिंग ले रहे डॉग्स को हैदराबाद से निविदा के माध्यम से खरीदा गया है।

खरीद के पूर्व इनका मेडिकल चेकअप होता है जिसमें शारीरिक विकास, विकलांगता, नजर और उम्र के हिसाब से शारीरिक विकास को परखा जाता है। जिन डॉग्स को डॉक्टर पास करते हैं उन्हें ही विभाग खरीदता है।

पहले डॉग्स की विभागीय स्तर पर भर्ती होती थी, जिसमें उन्हें अलग-अलग रैंक दिए जाते थे लेकिन अब खरीद होने के कारण रैंक देने की परंपरा खत्म हो गई है। हालांकि इनके हैंडलर को सफलता और काम के आधार पर वेतन व प्रमोशन आदि दिया जाता है।

हर मोर्चे पर सफल हो रहे डॉग्स

ट्रेनिंग सेंटर से प्रशिक्षित डॉग्स सुरक्षा बलों के लिए हर मोर्चे पर मददगार साबित हो रहे हैं। हमारे यहां के डॉग्स जितने भी मामलों को सुलझाने में सहायक होते हैं उनके बारे में हमें जानकारी मिलती है। इस साल भी पांच बेल्जियम शेफर्ड नस्ल के पांच डॉग्स को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। - सुरेश सिंह कुशवाहा, प्लाटून कमांडर, डॉग ट्रेनिंग सेंटर, भिलाई

ग्रेसी व जया का चयन एनएसजी दिल्ली के लिए

ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षित दो फीमेल स्नीफर डॉग्स ग्रेसी और जया का चयन एनएसजी (नेशनल सिक्योरिटी गार्ड) दिल्ली की ट्रेनिंग के लिए हुआ है। दोनों लेब्राडोर नस्ल की हैं। चयन के लिए 10 प्रांतों के स्नीफर डॉग पहुंचे थे। जया वर्तमान में धमतरी और ग्रेसी बिलासपुर में है। जया ने 2015 और ग्रेसी ने 2016 में भिलाई के डॉग ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण लिया था। दोनों प्रदेश की पहली ऐसी स्नीफर डॉग्स होंगी जो एनएसजी की श्रेणी में होंगी।

कुछ खास

- इंसानों में 4 तरह के ब्लड ग्रुप पाए जाते हैं मगर कुत्तों में 13 तरह के ब्लड ग्रुप होते हैं।

- इंसान के अलावा केवल कुत्ता ही ऐसा जीव है जो चेहरे के हाव-भाव पढ़ सकता है और इशारे भी समझ सकता है।

Source:Agency

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