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सौर-चंद्र कैलेण्डर अपनाइए

By Khabarduniya :12-10-2017 04:39


अप्रैल से मार्च के वर्तमान सौर कैलेण्डर को त्यागने के सरकार के मन्तव्य का स्वागत है। इस व्यवस्था में कैलेण्डर एवं वित्तीय वर्ष का अनावश्यक भेद बना रहता है। अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए भी यह प्रतिकूल है। इस कैलेण्डर के तीन विकल्प उपस्थित है। पहला विकल्प जनवरी से दिसम्बर के सौर कैलेण्डर का है। इसमें उपरोक्त समस्याएं समाप्त हो जाती है परन्तु मनुष्य को अपने कार्यों को चन्द्रानुकूल सम्पादित करने की समस्या बनी रहती है। दूसरा विकल्प चंद्र कैलेन्डर का है। इसमें मौसम तथा वर्ष का भेद बदलता जाता है इसलिए यह उपयुक्त नहीं दिखता है। तीसरा विकल्प सौर-चंद्र कैलेण्डर का है। इसमें मौसम तथा वर्ष का मूल सामंजस्य बना रहता है और मनुष्य को अपने कार्यों को चन्द्रानुकूल सम्पादित करने में भी सहूलियत होती है। 

हिन्दू संस्कृति में नया वित्तीय वर्ष दीपावली से शुरू होता है। लेकिन सरकारी कामकाज में वित्तीय वर्ष अप्रैल से मार्च गिना जाता है। सरकार ने मन बनाया है कि वित्तीय वर्ष की गणना अप्रैल से मार्च के स्थान पर जनवरी से दिसम्बर की जाए जिससे हमारा वित्तीय वर्ष अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुकूल हो जाए। अप्रैल से मार्च के वित्तीय वर्ष को हमने ब्रिटिश शासन से विरासत के रूप में प्राप्त किया है। आज भी इंग्लैंड में वित्तीय वर्ष इन्हीं माह से गिना जाता है। इसके विपरीत अमेरिका एवं कुछ दूसरे विकसित देशों में वित्तीय वर्ष की गणना जनवरी से दिसम्बर की जाती है। सोच है कि अपने वित्तीय वर्ष को जनवरी से दिसम्बर कर देने से हम ब्रिटिश उपनिवेशवाद की विरासत से मुक्त हो जाएंगे तथा अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए भारत में निवेश करने का एक और प्रलोभन दे सकेंगे। अमेरिका से विदेशी निवेश ज्यादा आने से जनहित हासिल होगा। 

अप्रैल से मार्च तथा जनवरी से दिसम्बर दोनों ही कैलेण्डर में मासिक गणना सूर्य से निर्धारित होती है। इस कैलेण्डर में 365 दिन के वर्ष को 12 माह मे विभाजित किया जाता है। 30 दिन का माह गिना जाए तो 12 माह में 360 दिन पूरे हो जाते हंै परन्तु 5 दिन का अन्तर रह जाता है। इन 5 दिन को समाहित करने को फरवरी में 2 दिन कम तथा 7 माह में एक दिन अधिक यानी 31 दिन गिने जाते हैं। इस प्रकार वर्ष 365 दिन का हो जाता है इस कैलेण्डर का लाभ है कि माह और मौसम का सामंजस्य बना रहता है। जैसे हर व्यक्ति आश्वस्त रहता है कि वर्ष दर वर्ष जुलाई के माह में वर्षा होगी। 365 दिन बाद पुन: वर्षा होगी और पुन: जुलाई का माह आ जाएगा। हर वर्ष नवम्बर के माह में दुकानदार गरम कपड़ों की खरीद करते हैं। इससे सरकार को अर्थव्यवस्था की प्लानिंग में सहूलियत होती है। जैसे हर वर्ष जून के माह में किसानों को धान के बीज उपलब्ध कराए जा सकते हैं। 

दूसरा कैलेण्डर चंद्रमा आधारित होता है। चन्द्रमा पृथ्वी के चारों तरफ एक चक्कर 30 दिन में लगाता है। इस कैलेण्डर में माह की गणना चन्द्रमा की गति के अनुसार 30 दिन में की जाती हैै तथा वर्ष 360 दिन का होता है। इस कैलेण्डर में हर वर्ष में मौसम तथा कैलेण्डर में 5 दिन का अंतर पड़ जाता है। इस वर्ष यदि वर्षा जुलाई में हुई है तो 6 वर्ष बाद वर्षा जून में होगी। चूंकि हर वर्ष में 5 दिन की कमी रह जाएगी और वर्ष की गणना 5 दिन पीछेे खिसक जाएगी। चंद्र कैलेण्डर में आर्थिक प्लानिंग करना कठिन हो जाता है। जैसे दुकानदार को इस वर्ष नवम्बर में गरम कपड़े मंगवाने होंगे लेकिन 12 वर्षों के बाद सितम्बर के माह में मंगवाने होंगे। लेकिन चंद्र कैलेण्डर के दूसरे लाभ है।

चन्द्रमा का जीवों के दिमाग पर भारी प्रभाव पड़ता है। अध्ययन बताते हैं कि फसल को चढ़ते चन्द्रमा में बोया जाए तो उत्पादन अधिक होता है। अथवा पूर्णिमा के दिन सड़क दुर्घटनाएं ज्यादा होती हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चढ़ते चन्द्रमा के समय नए कार्यों को प्रारंभ करना चाहिए जबकि उतरते चन्द्रमा में किए गए कार्यों को स्थिर करना चाहिए। चढ़ता चन्द्रमा बाह्यमुखी कार्यों को सिद्ध करता है जबकि उतरता चन्द्रमा अंतर्मुखी कार्यों को। इन लाभ को हासिल करने को इस्लाम में चंद्र कैलेण्डर को अपनाया गया है। इस प्रकार सौर कैलेण्डर को अपनाने में लाभ है कि वर्ष और मौसम का भेद समाप्त हो जाता है तथा आर्थिक प्लानिंग में सुविधा होती है, जबकि चंद्र कैलेण्डर में लाभ है कि मनुष्य अपने कार्यों को चन्द्रानुकूल सम्पादित करके सफलता हासिल कर सकता है। 

 
सौर और चंद्र कैलेण्डरों दोनों के लाभ को हासिल करने के लिए सौर-चंद्र के मिश्रित कैलेण्डर का आविष्कार किया गया। इस कैलेण्डर में माह की गणित 30 दिन में की जाती है और वर्ष 360 दिन का ही होता है लेकिन जैसा ऊपर बताया गया है मौसम के अनुसार कैलेण्डर बनाने में 365 दिन का वर्ष होना चाहिए। 5 दिन के इस अंतर को समाहित करने के लिए सौर-चंद्र कैलेण्डर में हर कुछ वर्षों के बाद अधिक मास जोड़ दिया जाता है। ऐसा कैलेण्डर हिन्दुओं एवं यहूदियों द्वारा लागू किया जाता है। इस कैलेण्डर में सौर और चंद्र कैलेण्डरों दोनों के लाभ हासिल हो जाते हैं।

अधिक मास जोड़ने से मूलरूप से माह और मौसम का सामंजस्य बना रहता है जैसे अधिक मास जोड़ने के पहले जुलाई के प्रारंभ में वर्षा आएगी जबकि अधिक मास जोड़ने के बाद जुलाई के अंत में वर्षा आएगी। कुछ दिनों के इस अंतर के अतिरिक्त मौसम तथा माह समान्तर चलते है। साथ-साथ माह की गणना चन्द्रमा के अनुसार करने से मनुष्य अपने कार्यों को चन्द्रानुकूल सम्पादित करके सफलता हासिल कर सकते हैं। इस कैलेण्डर के अनुसार ही भारत में वित्तीय वर्ष को दीपावली से दीपावली तक गणना की जाती थी। ज्योतिष के अनुसार इस प्रकार से गणना किया गया वर्ष लाभप्रद रहता है। 

अप्रैल से मार्च के वर्तमान सौर कैलेण्डर को त्यागने के सरकार के मन्तव्य का स्वागत है। इस व्यवस्था में कैलेण्डर एवं वित्तीय वर्ष का अनावश्यक भेद बना रहता है। अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए भी यह प्रतिकूल है। इस कैलेण्डर के तीन विकल्प उपस्थित है। पहला विकल्प जनवरी से दिसम्बर के सौर कैलेण्डर का है। इसमें उपरोक्त समस्याएं समाप्त हो जाती है परन्तु मनुष्य को अपने कार्यों को चन्द्रानुकूल सम्पादित करने की समस्या बनी रहती है। दूसरा विकल्प चंद्र कैलेन्डर का है। इसमें मौसम तथा वर्ष का भेद बदलता जाता है इसलिए यह उपयुक्त नहीं दिखता है। तीसरा विकल्प सौर-चंद्र कैलेण्डर का है। इसमें मौसम तथा वर्ष का मूल सामंजस्य बना रहता है और मनुष्य को अपने कार्यों को चन्द्रानुकूल सम्पादित करने में भी सहूलियत होती है। इस प्रकार हमारे सामने दो विकल्प रह जाते हंै एक संशोधित जनवरी से दिसम्बर सौर कैलेण्डर का तथा दूसरा सौर-चंद्र कैलेण्डर का। दोनों में ही वर्ष तथा मौसम का सामंजस्य बना रहता है। अंतर है कि संशोधित सौर कैलेण्डर अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए लाभप्रद है जबकि सौर-चंद्र कैलेण्डर देश की जनता के लिए लाभप्रद है। अथवा विषय अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियां बनाम देश की जनता का बनता है।

अर्थव्यवस्था की दृष्टि से सौर-चंद्र कैलेण्डर उत्तम बैठता है। अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को कुछ कठिनाई हो तो भी ब्रिटिश बहुराष्ट्रीय कंपनियों तथा मुस्लिम देशों के निवेशकों के लिए सौर-चन्द्र कैलेण्डर उपयुक्त रहता है। अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में बड़े पैमाने पर प्रवेश करें तो भी जनता पर उनके आगमन का प्रभाव संदिग्ध रहता है चूंकि इनके द्वारा तमाम भारतीय लोगों की जीविका को ध्वस्त किया जाता है। सौर-चन्द्र कैलेण्डर देश की जनता को अपने कार्य चन्द्रानुकूल करने का अवसर देकर स्पष्ट रूप से हितकारी है। संस्कृति की दृष्टि से भी यह कैलेण्डर भारत की अस्मिता के अनुकूल है। अत: हमें संशोधित धत सौर कैलेण्डर के स्थान पर सौर-चंद्र कैलेण्डर को अपनाना चाहिए। सरकार को अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को मोहाने करने के स्थान पर देश के नागरिकों को मोहित करना चाहिये।
 

Source:Agency

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